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नीतू नागर (अम्बर) का रचना संग्रह

नीतू नागर (अम्बर)

Name (English):
NEETU NAGAR (AMBER)

Name (Hindi):
नीतू नागर (अम्बर)

Occupation:
UPSC aspirants/social worker/NGo helper/guider/mentor/writer/poetess

Education:
BSC final and master of social work faist year

Address:
Gram post lashkarpur city narsinghgarh

City:
Narsinghgarh

Pincode:
465669

State:
Madhya Pradesh

Country:
India

About:
परिचय :-
लेखिका कवि- नीतू धाकड़ (अम्बर )
पता- नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश ग्राम लश्करपुर जिला राजगढ़
शिक्षा - बीएससी फाइनल / मास्टर ऑफ सोशल वर्क
वर्तमान शिक्षा - यूपीएससी छात्रा/MSW /राइटर/कवयित्री/महिला सशक्तिकरण हेल्पर/मेंटर/NGO helper। बच्चों को निशुल्क कोचिंग सेवा। प्रकृति प्रेमी। छोटी मोटिवेशनल स्पीकर और ब्लॉगर ।
रूचि - लोगों को सुनना और सीखना। यात्राएं

सम्मान -
1)श्री सरस्वती साहित्य सम्मान 2)जश्ने आजादी राष्ट्रीय साहित्यिक सम्मान
3)सहभागिता पत्र
4)दिनकर कवि राष्ट्रीय साहित्यिक सम्मान*
5) विद्या वाचस्पति सम्मान साहित्यिक सम्मान।
6) हिन्दी प्रतिभा सम्मान/रामधारी सिंह दिनकर राष्ट्रीय साहित्यिक सम्मान/हिन्दी साहित्यिक सम्मान/शिक्षक रत्न साहित्यिक सम्मान/महिला सम्मान २०२५/उत्कृष्ट लेखिका सम्मान/विश्व हिन्दी मानद उपाधि नेपाल से सम्मानित /महादेवी वर्मा सम्मान पत्र/मैथिलीशरण गुप्त सम्मान पत्र/काव्य रश्मि सृजन सम्मान पत्र/राष्ट्रीय काव्य प्रभा सम्मान पत्र/सर्वश्रेष्ठ रचनाकार सम्मान पत्र/श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान पत्र/राष्ट्रीय शरद साहित्य अमृत सम्मान पत्र/विजय साहित्य गौरव सम्मान पत्र/उत्कृष्ट सह लेखिका सम्मान पत्र/सप्त रत्न सम्मान/काव्य रत्न सम्मान पत्र/ काव्य दीपांजलि सम्मान पत्र/राष्ट्रीय काव्य अमृत सम्मान पत्र/राष्ट्रीय काव्य अरूण सम्मान पत्र/काव्य शिरोमणि सम्मान पत्र/भागीरथ सम्मान पत्र/राष्ट्रीय प्रहरी सम्मान पत्र/ साहित्य अमृत सम्मान पत्र
राष्ट्रीय साहित्य रत्न सम्मान पत्र /कलम के सिपाही सम्मान पत्र/कलम के साहित्यकार खिताब से सम्मानित/मेरी आवाज़ सम्मान पत्र/राष्ट्रीय गौरव अवार्ड (3बार)/हिन्दी काव्य रत्न सम्मान पत्र/राष्ट्रीय धर्म ध्वज गौरव सम्मान पत्र/सुकुमुद रत्न सम्मान पत्र/राष्ट्रीय प्रहरी सम्मान पत्र/

प्रकाशित कृतियां- बिलोग /कविता - अंतर्मन की खोज/यात्राएं/परीक्षा और परिणाम/बहुत सारे संकलनों में बुक जैसे - मीरा का प्रभु गिरधर नागर/मीत के प्रीत / राष्ट्रीय एकता और वर्तमान भविष्य/मां के नवरात्रें /दीपांजलि/करवाचौथ प्यार का प्रतीक/कहकशां/सुकुन/ अल्फ़ाज़/श्याम रसधार काव्य/खुशी के पल /भाई-दूज/उसके आंचल में आसमान में /रूह की आवाज/मेरे एहसास/ऊंची उड़ान/प्रकृति के अनुपम उपहार/ज्ञान का उजाला/नशा मुक्त भारत/उनकी यादों में/मेनी टयूगे इन फिलेम/खुली किताब/उपहार/उनके कंधों पर खड़ा मेरा आसमान/मां सृष्टि की पहली गुरू/रुत हो सुहानी/हमारी धरोहर/शुभ जन्मदिन/विंटर मिंट/पाला और ओस/ख्वाबों की गलियां/वो अधूरी कहानी/दा स्टोरी टेलर/इंक और लाइट/college डायरी/आज की नारी/जीवन से सीखें हुए सबक/साझा रचनाएं प्रकाशित हुई है।

इनाम- मेंडल/trophy/certificate/प्रशांसा पत्र/सहभागिता सम्मान पत्र

समाचार पत्र - मेरी रचनाएं और आर्टिकल 30 से ज्यादा बार छापे।
मोबाइल नंबर -8817451617

Pincode -465669

Hobbies & Interests:
लोगों को सुनना और सीखना और यात्राएं

Other Details:
मेरे विचार:-प्रस्तुत पुस्तक "तलाश: खुद से खुद के दरमियां "का महत्व अपने आप में बहुत महत्व रखता है। इस पुस्तक का नाम मेरे विचारों और जीवन में चलते रहने के अनुभवों से आया है,
मैंने अपनी चौबीस साल की उम्र में बहुत कुछ सीखा है, और साथ ही सफ़र की बहुत सारी चुनौतियों से लड़ते हुए ये पुस्तक को अपने शब्द दे पाई हूं।
खुद की तलाश में ही गुमनाम है हम सब और कभी भी खुद तक पहुंच ही नहीं पाये हम , और वो तलाश पुरी करने के लिए मात्र वो आंखें चाहिये जो आपके अंतर्मन से आपको वो दिखा पाये जो वाकई वास्तविक और प्रामाणिक है।
शायद आज हम वर्तमान में जीना छोड़कर या तो भूतकाल की बातों को लेकर परेशान हैं या भविष्य में क्या होगा इसको लेकर गुफ्तगू में लगें हैं, वर्तमान में जीना तो हम भूल ही गए और यही वर्तमान तो आपकी तलाश खुद से खुद में करवायेगा, परन्तु इसके लिए आपको हर समय खुद से वास्तविक दुनिया और ज़िन्दगी में जीना पड़ेगा जोकि हम नहीं करते, और ये मुखौटों को ओढ़े फिरते हैं हर पल ,ऐसे में तलाश खुद की नहीं हो पायेगी।
मैंने दर्शनशास्त्र में बहुत सारे विचारकों की विचारधारा पड़ी है और निष्कर्ष सबका यही है की तलाश खुद की करना , स्वयं को देख पाना, स्वयं को समझ पाना, मंजिल नहीं सफ़र का आंनद लेना, यहीं सार है सबका। इसलिए मैंने ये पुस्तक का नाम और इसमें लिखें सभी रचनाकारों की रचना इससे संबंधित है।
और मैं समस्त पाठकों से विनम्र निवेदन करती हूं की आप अपनी जिंदगी के स्वयं मलिक है परन्तु ऐसे सफ़र का क्या मतलब जहां आप खुद को ही देख न पाए,आप स्वयं की तलाश न कर पाए,ऐसे में बेहतर है कि,"जो पास है वो पर्याप्त है"। और इस दुनिया के मोह माया जाल में फंसाकर आप खुद की खोज और स्वयं का मूल्यांकन कर ही नहीं पाते, जबकि जीवन मिला ही इसलिए है ताकि हम स्वयं को समझ पाये, और सबसे महत्वपूर्ण एक इंसान का गहना ईमानदारी, परोपकारिता , और सत्यनिष्ठा है। इसलिए हकीकत तलाश स्वयं की उस रास्ते से करों जहां हर सफ़र आपको खुद से मिलाये।
इसी के साथ आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद ऐसे ही चमकते रहिये, पढ़ते रहिये, बढ़ते रहिये "


“तलाश” उस मनःस्थिति का नाम है, जहाँ इंसान दुनिया से सवाल करना छोड़कर खुद से संवाद शुरू करता है। जब रिश्तों की भीड़ में भी भीतर एक सन्नाटा गूंजता है। जब उपलब्धियाँ भी संतोष नहीं देतीं और हार भी कुछ सिखा जाती है। यह किताब उसी सन्नाटे की भाषा है।
इस संग्रह की रचनाएँ यह नहीं कहतीं कि जीवन सरल है या उत्तर साफ़ हैं। बल्कि यह स्वीकार करती हैं कि जीवन उलझनों से भरा है, और शायद उसी में उसकी सुंदरता है। यहाँ भावनाएँ सजाई नहीं गईं, बल्कि जैसी हैं, वैसी ही स्वीकार की गई हैं—अधूरी, असहज, कच्ची, लेकिन सच्ची।


यह एंथॉलजी पाठक को यह एहसास दिलाती है कि खुद को खोना हमेशा नकारात्मक नहीं होता। कई बार खुद को खोना ही वह रास्ता बन जाता है, जिससे हम अपने असली स्वरूप तक पहुँचते हैं। जब समाज की अपेक्षाएँ, परिवार के सपने, और परिस्थितियों का बोझ हमारे असली “मैं” को ढक देता है, तब यह तलाश शुरू होती है—खुद से खुद के दरमियान।


इस किताब में प्रेम सिर्फ दो लोगों के बीच नहीं ठहरता, बल्कि वह स्मृतियों, ख्वाबों, जिम्मेदारियों और आत्मसम्मान के बीच बहता है। यहाँ विरह भी है, लेकिन वह रोने के लिए नहीं, बल्कि समझने के लिए है। यहाँ टूटन भी है, लेकिन वह बिखराव नहीं, बल्कि पुनर्निर्माण की प्रक्रिया है।

यह एंथॉलजी पाठक से कोई निष्कर्ष थोपती नहीं, बल्कि उसे सोचने, रुकने और महसूस करने का अवसर देती है। यह किताब पढ़ते समय कई बार ऐसा लगेगा कि शब्द आपके नहीं हैं, फिर भी वे आपकी ही कहानी कह रहे हैं। क्योंकि सच्ची साहित्यिक रचना वही होती है, जो लेखक से निकलकर पाठक की आत्मा में घर कर जाए।

लेखिका कवियत्री नीतू नागर (अम्बर) नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश

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