Blog:- क्या हम वर्तमान में जीते हैं?
आज का मेरा अल्फ़ाज़ उस प्रश्न से उत्पन्न हुआ जब मैं बाइक चलते वक्त नज़ारों को छोड़कर, खुद के विचारों में खोई हुई थी, मुझे वो सड़क पर चलते परिवहन,वो हवा महसूस ही नहीं हो रहीं थीं, मैं उस पल शायद वर्तमान में नहीं जी रहीं थीं,
हम सब लोग आज यहीं कर रहें हैं की हम या तो भूतकाल के विचारों में जीते हैं या भविष्य की फ़िक्र में, परन्तु हम भूल रहे हैं की भूतकाल और भविष्य जैसे कुछ नहीं होता ये मात्र बस वर्तमान के ही दो रूप हैं एक जो निकल गया और एक वो जो आयेगा, और आप इसी कशमकश में वो जो पल होता है उसे कहीं खो देते हो,
ये जिंदगी मात्र खाने और कमाने की नहीं है यहां पर हवाएं भी आपको महसूस करनी है, आपको अंतर्मन की खोज करनी है ,हर सवाल के जवाब पाने की एक चाहा भी होनी है, जीवन से ज्यादा रास्ते सुंदर है आपके जीवन की मंजिल मृत्यु है तो रास्ते से सीखों उसी को जीना है,परन्तु हम ऐसा नहीं कर रहे हम अपने में उलझने की जगह दूसरों की जलन, दूसरों की लाइफ में क्या चल रहा इसी में फंसे पड़े हैं,हम यदि वर्तमान में जीते तो शायद समझ पाते की आखिर दुनिया क्या है और आपको क्या दिखा रहीं हैं,आपको जब आपके ही मोबाइल चला रहें हैं तो आप खुद के महत्व को शायद खोते जा रहें हैं, क्योंकि आज आप जो सोचते हैं मोबाइल का एल्गोरिथम वहीं आपको बार-बार दिखायेगा,हम एक्चुअली गुलाम हो गये है, मोबाइल के हमें नहीं पता कौन सा अस्तित्व और कौन सा वर्तमान है,हम बस एक संकीर्ण मानसिकता से ग्रस्त और दिखावें की दुनिया में अपनी शांति और सुकून ढुंढते फिर रहे हैं,मोह माया जाल में फंसाकर स्वयं को बुद्धिमान कहलवाना पसंद करते हैं,ये वर्तमान आपका आईना है इसको हर कोई नहीं देख सकता स्वयं को यहां बाहरी सुंदरता से कहीं गुना शक्ति आपके अंतर्मन में निहित है,जो वर्तमान में जीने से समझ आयेंगी, स्वयं को छोड़ दीजिए उस हवाओं के झोंके में जो आपके अंतर्मन से उठा होगा।
वर्तमान में जिकर आपने आज को बेहतर बनाना हे,इसी के साथ आपका बहुत बहुत धन्यवाद अपने कीमती समय निकाल कर मेरा ब्लॉग पढ़ा और उसे महसूस किया।
लेखिका कवयित्री -नीतू नागर अम्बर नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश


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