ब्लॉग - "माफी मांगना और माफ कर देना"
आज का मेरा अल्फ़ाज़ माफी से संबंधित है।जोकि एक गंभीर और संवेदनशील विचार है इंसान गलतियों से सीखता है ,और हर गलतियां इंसान को कुछ न कुछ सीखाकर जाती है, अक्सर हमने देखा है की कोई इंसान जिससे गलती हो जाये और यदि आप उसके लिए महत्वपूर्ण हो तो वो बहुत माफ़ी मांगेगा, आपको मनायेगा,ऐसे में हम उसको माफ करके उसे एक मौका देते हैं मगर अक्सर लोगों वापिस वो गलती करते हैं क्या ऐसे मैं उनको माफ कर दें क्या? ये सवाल अपने आप में गहरा है क्योंकि मैंने उसे हर बार माफ करके,उसे एक और गलती करने का,मौका दिया है।
परन्तु मैंने संदीप महेश्वरी सर से ये बात समझी है की सबसे बेस्ट तरीका है माफी का की ये तो समाने वाले को माफ़ कर दो,या स्वयं को माफी दे दो।
दोनों ही केस में आपकी अंतरात्मा को संतुष्टि होनी जरूरी है,ये गुस्सा रखकर कोई सार्थक संवाद स्थापित नहीं होगा।इससे अच्छा है कि माफ कर दो और अगली बार वो गलती करें ऐसी उम्मीदों को जन्म न दो। ताकि उसकी गलतियां आपको हर्ट न करें।
माफ़ी देना बहुत जरूरी भी है क्योंकि हम मौका नहीं देंगे तो समाने वाले में सुधार कैसे देख पायेंगे इसलिए हकीकत यही है, कि माफ करके आगे बढ़ें।
कुछ न रखा इस स्वार्थ की दुनिया में यहां जो आपको चाहेंगा वो आपको ग़लती होने पर बहुत प्रयास करेगा की आपको मना लें। और जिससे गलती करनी है वो हजार मौके देने से भी नहीं सुधारेगा ।
इसलिए माफ करने का हृदय रखों बदलाव तभी आयेगा वरना कोई फर्क न बचा उस पत्थर में जो कितना ही घीस जायें पर अकड़ तो वो कठोरता की रहेंगी।
आज के समय की मांग ईमानदारी है पर वो मिलती नहीं , और ऐसे में हम गलतियां न हो ऐसा सम्भव नहीं है।इंसान की प्रवृत्ति ही ऐसी हो रखी है ,की वो झूठ को गले लगाकर खुश हैं। ऐसे में माफ़ कर देना ही बेस्ट बात है,और ज्यादा उलझना भी सही नहीं है, क्योंकि जिंदगी है उसको किसी बिंदु पर इतना न खिंचों की उसका अस्तित्व खत्म सा हो जाये, इसलिए आज मैं जिओ माफ़ करते चलों और उम्मीद कम करते रहों।
निम्न लाइनों में समां होकर देखिये मेरे अल्फ़ाज़ को...
माफ़ी मांग ली तुमने,हमने माफ़ किया,बस ये गलतियों से सीखना,और सच का दमन थमना,बस इतनी बातें जानना, गलतियां को तुम पहचानना, माफ़ कर देना बहुत बड़ी बात है,
ये माफ़ करने का एहसास खास है।
माफ़ करने से जीवन सरल और सहज लगता है, फालतू की गुफ्तगू करने से बेहतर है ।अच्छे इंसान बनें सच को देखें खुद को समझें,याद रखियेगा "माफ़ी वहीं देता है जो निभाना जानता है " इसलिए माफ कीजिए और इस ईश्वरीय शक्ति को धन्यवाद बोलिए कृतघ्नता प्रेषित कीजिए, कुछ शुक्रिया करके तों कुछ माफ करके माफ़ी मांग कर।
उपरोक्त शब्दों में सिमट कर जो मैं बताना चाहती थी वो बताया है उम्मीद करती हूं आप लोगों भी माफी मांगना और माफ करने में अपनी पहचान और संस्कार स्वाभिमान को नजर रखकर स्वयं को इस दुनिया के मोहजाल से ऊपर रखोगे।
लेखिका कवि-नीतू नागर अम्बर नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश


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