#blog :- एक अनुभव और सीख बुढ़ापा
आज मेरा ख्याल और विचार उस पल की ओर है जहां जीवन अपनी अंतिम अवस्था में होता है, वहीं एक ओर हमारे अनुभव और सीख के वो मार्गदर्शक रहें हैं वो हैं हमारे "बुढ़े बुजुर्ग " जिनसे हम हर पल सीखते हैं जीवन में आने वाली कठिनाईयों के लिए तैयार रहते हैं ।
आइये देखते हैं की बुढ़े बुजुर्ग किस तरह हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं,वो न केवल घर की शोभा होते हैं बल्कि हमारे संस्कारों की रेखा होते हैं,वो हमें प्राचीन काल का ज्ञान वा अपने अनुभवों से परिपूर्ण अपने जीवन का सार बताते हैं और हमारे जीवन में एक साथी की तरह साथ देते हैं।
कल के रोज में अपनी नानी के साथ बैठीं थीं तब नानी अपने समय की बात बताने लगी की पहले किस तरह महिलाओं को वो सब सुविधाएं उपलब्ध नहीं थी जो आज हमें उपलब्ध है,पहले महिलाएं 7-9 किलोमीटर दूर से पानी लाती थी, परिवहन अपने पैरों से ही पुरा करती थी,न ठंड के कपड़े, न महावारी के लिए साफ सुथरा माहौल भी नहीं था,इसके अलावा कृषि का कार्य में भी पुरा सहयोग करती थी।वहीं पुरुष भी सभी कामों में व्यस्त रहते थे।
ये सब सुनकर मैं दंग रह गयी आज हमसे एक छोटा सा काम नहीं होता टालमटोल करते रहते हैं। अपने बुढ़े बुजुर्ग का संघर्ष बहुत ही सबक और अनुभव भरा है।जिसको हमें सहेजना और समझना है और एक बेहतरीन समाज परिवार की नींव स्थापित करना है।
आज बुढ़े बुजुर्ग लोगों पर बोझ समझे जाते हैं,पर ये भुल जाते हैं की इन लोगों ने ही हमें आज इस काबिल बनाया की हम खुद को समझ पा रहे हैं आज हम ही अपने बुढ़े बुजुर्ग से खीझ खाते हैं।
हम ये क्यों भूल जाते हैं की हमारा भी बुढ़ापा आयेगा हमारे बच्चे भी हमसे ऐसा ही बरतव करेंगे तब हमें शाय़द उनके दर्द का अनुभव होगा ।जो आप बोओगे वहीं आप कटोगे इसलिए हकीकत को जानकर ही अपना व्यवहार दिखायें।
जब बचपन में आप गिरते हैं तो मां पापा नाना-नानी ने हमें सम्हाला और जब बुढ़ापा होता है तो हम हमारे बुजुर्ग के हाथ छुडवाना चाहते हैं।उनकी देखभाल न करनी पड़े इसलिए वृद्धाश्रम भेजते हैं। हमारी ये सोच ही आपको भी ये दिन दिखायेंगी।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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