विधा -कविता
विषय - भीगते अल्फ़ाज़
शीर्षक - मौसम के अल्फ़ाज़
बिगड़े अल्फ़ाज़ इन मौसमों में,
न जाने कब वो बहार आ गई।
सूखे पत्तों ने भी मुस्कुरा कर,
फिर से नई उमंग जगा दी।
हवाओं में घुली है नई कहानी,
बारिश ने मिट्टी की ख़ुशबू सजाई।
दिल के वीराने में खिला एक गुलाब,
ज़िंदगी ने नई राह दिखाई।
आसमान पर रंगों का मेला,
जैसे कोई सपना हक़ीक़त बन गया।
पंछियों की चहचहाहट ने कहा,
ग़म के बाद सवेरा आ गया।
दिल ने भी सीखा मुस्कुराना,
हर दर्द को धीरे-धीरे भूल जाना।
ये मौसम सिखाता है हर बार,
अंधेरों के बाद उजाला आ ही जाता है।
लेखिका कवि-नीतू धाकड़ अम्बर नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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