विषय - चेहरों के पीछे की दुनिया
शीर्षक - मुखौटे
ये जो तुम लिए घुमते होना ,
ये वो मुखौटे है जो बिकते हैं,
सरेआम सौदा बाजार में,
हर इंसान का खिलौना बनता है।
हर चेहरे की पीछे कई चेहरे हैं,
हर चेहरे में राज बहुत गहरे हैं,
कोई बोलता अपना बनाकर,
कोई दिखाता रंग बदलकर।
हां ये वो मुखौटे है जो,
स्वार्थ में मैकअप करते हैं,
मतलब का रिश्ता रखकर ,
ज्ञान की बात बताते हैं।
मुखौटे चढ़ाकर कहां तक जाओगे,
एक दिन मुखौटों से बाहर तो आवोगे,
अब झूठ ना बोलो तुम,
चेहरे अपने पहचानों तुम।
आईना देखों तो मुखौटे,
खुद-ब-खुद उतर जायेगा,
चश्मे से नहीं अपनी आंखों से देखों,
सच जरूर नजर आयेगा।
लेखिका कवि-नीतू धाकड़ अम्बर नरसिंहगढ़


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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