विषय - मनुष्यता की तलाश में
शीर्षक - सबकुछ तेरे अंदर है
वा रे मनुष्य बाहर तलाश करता अपने मन की,
क्यों न देख पाया तु मन को,
अपने अंतचित मन को,
जो सबकुछ तेरे अंदर है।
मानवता सब तेरे विचार में,
संस्कार मूल्यों से सजाएं,
परोपकार का बीज बोकर,
उजियारी तलाश कहलाएं।
जगा अपनी ईमानदारी को तु,
मनुष्यता की कीमत पहचान,
स्वार्थ ना रखना मानव हित में,
सबको सुखी बना मन से।
स्वयं की तलाश पहले पुरी कर,
मनुष्यता अपे आयेंगी,
स्वयं को देख मन के दर्पण में,
मनुष्यता रंग ये लायेगी।
खोज खुद की पुरी करलें,
यही मूल रूप बातों का है,
मनुष्यता की तलाश पुरी,
खुद के सारे विचारों में।
लेखिका कवि-नीतू धाकड़ अम्बर नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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