"मंजिल "
मुझे दिखती भी मंजिल भी,मगर राहें ये मुश्किल है,
मुझे हे धूप भी सहनी, मगर छांव भी मुश्किल है।
मगर चलता राह , यूंही राहें मैं जीत जाऊगा,
सफ़र से लौटना वापिस,यह मेरा हौसला न कहता।
मैं टकराय मुसीबत से तो,कई बार हूं गिरा ,
मगर हर बार अपनी सीख से , मैं सम्हाल जाता हूं।
अगर देखना हो तो देखो ,वो राह की खुबसूरती,
मैं अपने नन्हे कदमों से, मंजिल के पास आ गया।
एक राह राम ने पुरी की, समुद्र पार करके,
वो दूसरी मैंने की , अपनी मंजिल को पा कर।
लेखिका कवयित्री नीतू नागर अम्बर नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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