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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

तलाश खुद से खुद के दरमियां

प्रस्तुत पुस्तक "तलाश: खुद से खुद के दरमियां "का महत्व अपने आप में बहुत महत्व रखता है। इस पुस्तक का नाम मेरे विचारों और जीवन में चलते रहने के अनुभवों से आया है,
मैंने अपनी चौबीस साल की उम्र में बहुत कुछ सीखा है, और साथ ही सफ़र की बहुत सारी चुनौतियों से लड़ते हुए ये पुस्तक को अपने शब्द दे पाई हूं।
खुद की तलाश में ही गुमनाम है हम सब और कभी भी खुद तक पहुंच ही नहीं पाये हम , और वो तलाश पुरी करने के लिए मात्र वो आंखें चाहिये जो आपके अंतर्मन से आपको वो दिखा पाये जो वाकई वास्तविक और प्रामाणिक है।
शायद आज हम वर्तमान में जीना छोड़कर या तो भूतकाल की बातों को लेकर परेशान हैं या भविष्य में क्या होगा इसको लेकर गुफ्तगू में लगें हैं, वर्तमान में जीना तो हम भूल ही गए और यही वर्तमान तो आपकी तलाश खुद से खुद में करवायेगा, परन्तु इसके लिए आपको हर समय खुद से वास्तविक दुनिया और ज़िन्दगी में जीना पड़ेगा जोकि हम नहीं करते, और ये मुखौटों को ओढ़े फिरते हैं हर पल ,ऐसे में तलाश खुद की नहीं हो पायेगी।
मैंने दर्शनशास्त्र में बहुत सारे विचारकों की विचारधारा पड़ी है और निष्कर्ष सबका यही है की तलाश खुद की करना , स्वयं को देख पाना, स्वयं को समझ पाना, मंजिल नहीं सफ़र का आंनद लेना, यहीं सार है सबका। इसलिए मैंने ये पुस्तक का नाम और इसमें लिखें सभी रचनाकारों की रचना इससे संबंधित है।
और मैं समस्त पाठकों से विनम्र निवेदन करती हूं की आप अपनी जिंदगी के स्वयं मलिक है परन्तु ऐसे सफ़र का क्या मतलब जहां आप खुद को ही देख न पाए,आप स्वयं की तलाश न कर पाए,ऐसे में बेहतर है कि,"जो पास है वो पर्याप्त है"। और इस दुनिया के मोह माया जाल में फंसाकर आप खुद की खोज और स्वयं का मूल्यांकन कर ही नहीं पाते, जबकि जीवन मिला ही इसलिए है ताकि हम स्वयं को समझ पाये, और सबसे महत्वपूर्ण एक इंसान का गहना ईमानदारी, परोपकारिता , और सत्यनिष्ठा है। इसलिए हकीकत तलाश स्वयं की उस रास्ते से करों जहां हर सफ़र आपको खुद से मिलाये।
इसी के साथ आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद ऐसे ही चमकते रहिये, पढ़ते रहिये, बढ़ते रहिये "


“तलाश” उस मनःस्थिति का नाम है, जहाँ इंसान दुनिया से सवाल करना छोड़कर खुद से संवाद शुरू करता है। जब रिश्तों की भीड़ में भी भीतर एक सन्नाटा गूंजता है। जब उपलब्धियाँ भी संतोष नहीं देतीं और हार भी कुछ सिखा जाती है। यह किताब उसी सन्नाटे की भाषा है।
इस संग्रह की रचनाएँ यह नहीं कहतीं कि जीवन सरल है या उत्तर साफ़ हैं। बल्कि यह स्वीकार करती हैं कि जीवन उलझनों से भरा है, और शायद उसी में उसकी सुंदरता है। यहाँ भावनाएँ सजाई नहीं गईं, बल्कि जैसी हैं, वैसी ही स्वीकार की गई हैं—अधूरी, असहज, कच्ची, लेकिन सच्ची।


यह एंथॉलजी पाठक को यह एहसास दिलाती है कि खुद को खोना हमेशा नकारात्मक नहीं होता। कई बार खुद को खोना ही वह रास्ता बन जाता है, जिससे हम अपने असली स्वरूप तक पहुँचते हैं। जब समाज की अपेक्षाएँ, परिवार के सपने, और परिस्थितियों का बोझ हमारे असली “मैं” को ढक देता है, तब यह तलाश शुरू होती है—खुद से खुद के दरमियान।


इस किताब में प्रेम सिर्फ दो लोगों के बीच नहीं ठहरता, बल्कि वह स्मृतियों, ख्वाबों, जिम्मेदारियों और आत्मसम्मान के बीच बहता है। यहाँ विरह भी है, लेकिन वह रोने के लिए नहीं, बल्कि समझने के लिए है। यहाँ टूटन भी है, लेकिन वह बिखराव नहीं, बल्कि पुनर्निर्माण की प्रक्रिया है।

यह एंथॉलजी पाठक से कोई निष्कर्ष थोपती नहीं, बल्कि उसे सोचने, रुकने और महसूस करने का अवसर देती है। यह किताब पढ़ते समय कई बार ऐसा लगेगा कि शब्द आपके नहीं हैं, फिर भी वे आपकी ही कहानी कह रहे हैं। क्योंकि सच्ची साहित्यिक रचना वही होती है, जो लेखक से निकलकर पाठक की आत्मा में घर कर जाए।


अंततः, यह किताब इस सत्य को स्वीकार करती है कि
हर इंसान की सबसे कठिन, सबसे ईमानदार और सबसे ज़रूरी यात्रा—खुद से खुद के दरमियान ही होती है।

Writer Neetu nagar amber




लेखिका कवियत्री नीतू नागर (अम्बर) नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (2)

+

रीना कुमारी प्रजापत said

👍👍

वन्दना सूद said

“तलाश” उस मनःस्थिति का नाम है, जहाँ इंसान दुनिया से सवाल करना छोड़कर खुद से संवाद शुरू करता है।
बहुत सुंदर लेखन 👏👏क़बीलयतारीफ़

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