विषय- आईना हमारे बारे में क्या सोचता है।
आईना भी सोचता होगा कि,
लोगों के असली मुखौटे तो,
कुछ और ही है,
और चेहरे बदलते हजार,
रोज ही है।
अच्छा हुआ आईना बोलता नहीं,
वरना झूठ का लिबास उतरता नहीं,
कहते सच है लोग की,
जानते खुद को नहीं,
और चेहरे पर धूल है,
और साफ़ आईना करते हैं।
एक लिबास उतरता है आईने का,
तब सच कहीं समाने आता है,
गर आईने बोलते तो,
सब लोग जानते सब।
ये आईने दिखाते रंग आपका,
वक्त की नजाकत सा,
ये दिखाता चेहरा रूपों का,
और रोशन करता चेहरों को।
लेखिका कवि-नीतू धाकड़ अम्बर नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







