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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

रामायण और वर्तमान समय

Blog:- रामायण और वर्तमान समय


हां आज मैं अपने अल्फ़ाज़ जो हमारे धार्मिक भावनाओं में सृजित रामायण को वर्तमान जीवन के पैमानों पर उतरने का प्रयास किया है, और साथ ही ये रंगोली में बताया गया संक्षेप में पुरी रामायण का वर्णन है,तो आइये शुरूवात हम... रामजी के वनवास से करते हैं जहां राम जी वचन और प्रतिबद्धता को स्वीकार करते हैं ठीक उसी तरह आज वर्तमान में भी हमें हमारे पढ़ाई, सपने, बिजनेस में भी यही प्रतिबद्धता की जरूरत है,

वहीं देखा जाये तो राम जी को वनवास जाना था ,पर सीता पत्नी थी और पत्नी धर्म साथ निभाता है, जोकि आज वर्तमान की जरूरत है, सबसे महत्वपूर्ण बात ये है की पुरी रामायण में सबसे ज्यादा यदि किसी ने वनवास भोगा तो वो लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला है जिन्होंने अपने मन को मजबूत किया और लक्ष्मण को जाने दिया, और चौदह साल का वनवास अपने अंदर समेटे हुए बैठी रही न वो बता पाई व्यथा अपने मन की, और इससे ही आज नेकी बोलते हैं,सब सहना होगा और समाने वाले जब अपने हो तो आपके अंदर बहुत कुछ सहना होगा,
साथ ही रामायण का हर चरित्र आपको अपने जीवन में बेहतर बनायेगा यदि हम इससे देखें और फोलो करें तो,जिस तरह मैंने सीता माता से सीखा की इंसान हमेशा बेहतर की तलाश में जो पास होता है उसे भी खो देता है, जैसे सीता माता ने सुंदर हिरण को देखकर उसे पाने की इच्छा की और चिरहरण हो गया,जब वो अशोक वाटिका में बैठी तब उनको राम की इच्छा थी, समझें आप लोग कुछ की इच्छा आज हमारे पतन का कारण है,हम बिना स्वार्थ कुछ नहीं करते, बेहतरीन की तलाश हमें हमेशा रहती है,हमारे पास है उसको हम देख ही नहीं पा रहें हैं, क्यों न हम जो हमारे पास है उसे ही बेहतर से बेहतरीन बना लें, परन्तु ऐसा हम नहीं सोचते,

आइये आगे रामायण में कुछ लोग जैसे सुग्रीव जी, जामवंत जी, जैसे व्यक्तित्व जो राम के लिए रास्ता बनाते हैं साथ देते हैं, ठीक उसी तरह आज वर्तमान में आपका उद्देश्य में कितनी सच्चाई है, यदि सच्चाई है तो आपके मार्ग में आपकी मदद के लिए बहुत अच्छे लोग प्रकृति , जानवर,नल नीर सब आयेंगे,बस वो ललाक आप में होनी चाहिए,जो राम को समुद्र पार करवा दिए तो हम तो इंसान हैं,

रामायण से बहुत कुछ सीखने को
मिलता है, जहां रावण का चरित्र मुझे प्रभावित करता है, क्योंकि रावण वेदों का ज्ञाता,तीन लोक का स्वामी,शिव का शीर्ष भक्त अपने आप में विशिष्ट और विशाल व्यक्तित्व का परिणाम है, और यदि रावण चाहता तो सीता के साथ कुछ भी ग़लत कर सकता था,पर उसने ऐसा नहीं किया, सीता को सुरक्षित रखा, और राम से युद्ध किया, और युद्ध में भी नहीं हारता यदि विभीषण जी रावण के मौत का भेद नहीं बताते तो,छल से मारा गया, रावण तो आज यूंही बदनाम है असली रावण तो आप हो जो बलात्कार और लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करते हो, हजार मुखौटे ओढ़कर रखते हो, और गलत रावण को बताते हो,ये दुनिया है यहां वास्तविकता आपके चश्मे से बहुत अलग है,
इसलिए अपनी नजरों से देखने का प्रयास करों उस सच को जो वाकई में है,इससे आगे चलें तो हम रामायण से सीखने को मिलता है की किस तरह लव-कुश ने अपनी मां के लिए अयोध्या नगरी में राम की महिमा गाकर, रामजी को एहसास दिलाया,

ठीक उसी तरह हमें भी हमारी मां के लिए इतना तो कर सकते हैं, जिन्होंने हमें ये जिंदगी दी है, इसलिए समय अपनी मां पापा, परिवार के साथ बिताए न की मोबाइल में,जीवन में समांजस्य लाइये, स्वयं को राम समझना बंद करो, कोई हनुमान नहीं आयेगा मदद के लिए जब तक आप स्वयं को नहीं समझ लेते,यही भागवत कथा का सार है, लड़ो खुद को देखो, अंतर्मन को समझों, और ईमानदारी से रहों यही, सत्ययुग, त्रेता,द्वापर, कलयुग है, और यहीं आपका वर्तमान है,"यही कृष्ण है, यही राम, यही शिव, यहीं शक्ति है,यदि आप स्वयं को समझ लिये ये आपकी शक्ति है "।

नोट:- मैंने जो भी सीखा अपने अनुभव और पढ़ाई से उसके अनुसार छोटा सा प्रयास किया है, और मेरा उद्देश्य किसी भी चरित्र के साथ मैंने सामंजस्य स्थापित करके वर्तमान को जोड़ा है, ताकि हम स्वयं को शाय़द इस माया की दुनिया से स्वयं की तरफ चलने लगें और सत्य के साथ स्वयं की खोज को खुद से जोड़ पाये।

लेखिका कवयित्री यूपीएससी छात्रा सोशल वर्कर -नीतू नागर अम्बर नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश




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