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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

रिजल्ट ए अल्फ़ाज़

#blog :-"सफ़र -A-Exam day अल्फाज़"


ये अल्फाज़ उन हर एक Aspirants का है ।जो परीक्षा के दिन जब घर से निकलता है तो उसके साथ उसके परिवार की उम्मीदें भी साथ साथ जाती है ....जब aspirants परीक्षा के लिए कार /बस/पैदल जाता है तब उसके दिमाग में की विवाद चलते रहते हैं उस समय उसे वो सुबह की बहती हवा भी मानो उसका साहस को चुनौती दे रही हो..! वहीं कार में चलते song की बीट्स भी अधूरी लगती है ।मानो उस पल उस song ka कोई अल्फाज़ नहीं हो ..... यहां से आगे बढ़कर जैसे जैसे exam time पास आता है वैसे वैसे धड़कन अपनी उत्कृष्टता पर होती,, वही Aspirants अपने मन में बोलता है कि शांत और cool रहे यार घबराना नहीं है यार ऐसे करके खुद को समझता है परन्तु अपने और सपनों के बीच चलता वो युद्ध मानो aspirants को कड़ी चुनौती दे रहा हो ....! फिर aspirants अपने Roll number बोर्ड पर देखकर सोचता है कि जिस दिन result आयेगा तब मेरे roll number उसमें होंगे....!?या नहीं अंतर्मन में चलता यह विचार मुझे और प्रबलता प्रदान करता है.... फिर aspirants खुद को एक कदम और आगे लेकर जाता है और exam room में प्रवेश लेता है जहां उसके सम्पूर्ण शरीर में एक अलग सी गुमशुदगी नज़र आती है,,उस बेंच पर उस समय एक aspirants नहीं बल्कि उसके सालों का संघर्ष बैठा है जो... अभी 2 hour में उसके कई सालों को प्रदर्शित करता aspirants को फिर डबल चुनौती में घेरता चला जाता है!!?... फिर जैसे ही पेपर हाथों में आता है वैसे ही लगता है मानों ...वो खुद को सहज करने कि कशमकश में लगा हो और फिर एक गहरी तेज़ सांस लेकर प्रश्न पढ़ना शुरू करता है....?
आते हुऐ प्रश्न थोड़ी राहत प्रदान करता है वहीं जैसे जैसे प्रश्न का बढ़ता रुख़ समय और कितने Question और बचें है इस हड़बड़ी में aspirants को फिर याद आता है कि नहीं होगा तो... मां पापा की उम्मीदें,सालों का संघर्ष, तमाम हसराते एक पल में भारी दवाब बनाती है और फिर aspirants डबल ऊर्जा से भरकर प्रश्न को ध्यान से पढ़ता है ।....
हर कोशिश करता है कि यहां प्रश्न सही हो ... भगवान से कई प्रार्थना करते हुये.. वो थोड़ा सहज होता है जैसे ही जब समय खत्म होता है और copy submit कर दी जाती है तब .. वह फिर एक गहरी सांस लेकर बाहर निकालता हुआ अपने आप को विश्लेषण कि process में लेकर जाता है और....हल्की मगर नम smile अपने चेहरे पर रखता है।
बाहर खड़े asprints के पापा/भाई /दोस्त इस उम्मीद में धूप में खड़े हैं ताकि उनका बेटा/बेटी इस धूप की तपश को महसूस न करें _ वही जो aspirants की मनोदशा उस समय है कि यार पापा मेरी पढ़ाई के लिए दिन रात काम करते हैं मेरे लिए धूप में खड़े हैं उनको अब आराम देना है... aspirants अपने आपको और समेट लेता है और बोलता है ठीक हुआ पेपर let's see

सही है रणभूमि में युद्ध होने से पहले एक aspirants कई बार अपने मनोभूमि में लड़ता रहता है...!?
Jab vah rat ko ghar ata ha to ...khud ka analysis karta ha tb...vo khud ko samhalne ki kosis mai lagta ha ..kyoki hame pta hota ha hamra hoga ya nhi ?!! और फिर उदासी का आलम और इल्म अंदर से एक दम बेरुखी से लबालेश कर देता है।।
और फिर aspirants अपने आपको एकदम छोड़कर.... कुछ क्षण के लिये 'शून्य '(blank) हो जाता है..!!?


Solution:- जिंदगी एक सफर है हमें हर असफलता एक नया पाठ पढ़ायेंगी, और हर एक सफलता एक और इंतहान के लिये तैयार करेगी क्योंकि सफ़र ही तो है जो चलता रहेगा.. जहां हमें बस थोड़ा साहस और धैर्य को समांजस्य बनाकर चलना है।.... वर्तमान को जीना आना चाहिए हमें.. क्योंकि past or future कुछ नहीं होता यहां बस वर्तमान के ही दो रूप हैं जो कभी present the .... living in present "

हां आप अरे!हां आप सबकुछ कर सकते हों..बस "विश्वास"को अपना आईना बनाओं'

Thank you so much आप लोगों ने मेरे अल्फ़ाजो को पढ़ा क्योंकि अल्फाज़ तो आपके भी है।right na ✅😊

"हम योद्धा हैं लड़ेंगे भी उसी तरह ,बस चलते चलेंगे"


लेखिका कवि-नीतू धाकड़ अम्बर नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (1)

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सरिता पाठक said

बहुत खूब, बहुत सुन्दर युवा वर्ग का उत्साह वर्धन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, सादर प्रणाम 🙏

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