"मिट्टी में मड़-मड़कर ,वो शीतल सुराई बनी
मैं तपती आग में जल जलकर,वो किरदार बनी।
थी अंजान में हकीकत से, राहों की फकीकत से,
सपनों की शीथिलता से, शहरों के शोरों से,
वो भटकते मनो से,वो गुज़रती गलियों से,
चुन चुनकर बुन लिया, सफ़र के कांटों को,
और उन्हीं कांटों से, मैंने अपना किरदार पिरोया।
न धागों से न शब्दों से, और न ही होशियारी से,
मैंने बुना है अपना किरदार, अपने इन्हीं हाथों से।
मिट्टी का घरौंदा है, मिट्टी में ही मिल जाना है ,
तेरा किरदार बस महकें,शरीर तो मिट्टी हो जाना ..!!😊✍️
लेखिका - Neetu nagar


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







