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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

नारी का श्रृंगार क्या है?

Blog: नारी का श्रृंगार क्या है?

आज मैं वो सच से सबको रूबरू करवाना चाहती हूं जो मेरे विचार में मुझे खुद से सवाल करने पर मजबूर कर देता है,की नारी का श्रृंगार क्या है..? क्या नारी शक्ति मात्र कोमलता और वात्सल्य का भाव ही सिमटे हुई है या उससे ऊपर भी वो अपने सपने,का श्रृंगार भी कर सकती हैं,किसी एक पहलू से देखा जाए तो महिलाएं घर और बच्चों को सम्हाले काफी है, उनके सपने और वो कुछ कर दिखाने की चाह को उनके अंदर इस तरह दफ़न कर देना , क्या उचित होगा।

पहले भी महिलाओं को वो बराबरी नहीं मिली जो मिलनी चाहिए, हां मानती हूं सबको अलग-अलग काम और कर्तव्य पहले से समाज की सोच में गढ़े हुए हैं,
पर ये कहां लिखा हुआ है की वो सोच अब न बदल सकती , स्त्री घर के साथ अपनी ड्यूटी नहीं निभा सकती?‌ फिर क्यों.? ये बेड़ियों में जकड़ा हुआ है की लड़कियां ये नहीं कर सकती वो नहीं कर सकती,जरा सोचा है यदि लड़की चाहे तो क्या कुछ नहीं कर सकती,वो भी मर्यादा और संस्कार में रहकर,यदि आप दस कदम आगे बढ़ रहें हों तो नारी को भी दस कदम आगे साथ लेकर बढ़ो न? क्यों हम एक नारी से मात्र मैक अप की उम्मीद होती है। क्या वो आपकी बराबरी वाला श्रृंगार नहीं कर सकती , क्या वो आपका सहारा वाला श्रृंगार नहीं बन सकतीं,

आप स्वयं थोड़ा सा खुद से ये सवाल कीजिए?क्या एक नारी आपकी बराबरी या आपकी तरह अपने सपने पुरे करने लगे, तो क्या देश और समाज की उन्नति नहीं होगी? ज़रूर होगी, एक पुरुष महिला से प्रेम कर सकता है,तो उसके सपने भी उसको पुरा करनें में उसका साथ और हाथ हर कठिनाइयां में थाम कर रख भी सकता है।"एक बदलाव ही नये विचारों पर सोचने की क्षमता देते हैं" हमें ये बतलाना होगा की नारी शक्ति अब जागो और अपने स्वाभिमान के लिए उठकर लड़ो,जो पुरुष शिक्षित होगा वो जरूर हर उस नारी को चार कदम आगे बढ़ाने में मदद करेगा,
अब इक्कसवीं सदी में महिलाएं अपना कदम बढ़ा रही है,चाहे वो स्वतंत्रता संग्राम में लक्ष्मीबाई हो या देश की राष्ट्रपति महोदय जी या साहित्य में महादेवी वर्मा,या खेल के मैदान में हरमनप्रीत हो या ऐसे बहुत सारे क्षेत्रों से महिलाएं उभर रहीं हैं,ये समृद्धि की दस्तक दे रहीं हैं,इनका स्वागत कीजिये न की दुष्कार।

माना आप अच्छा कर रहें हैं पर वहीं अच्छा हम नारी शक्ति भी कर सकते हैं, और कर रहे हैं, नारी के अंदर बचपन से बीज बो दिए गए हैं की तुम ऐसा नहीं कर सकती तुम सवाल जवाब नहीं कर सकती, तुम चुप रहो घर का काम करों और बस ,वो नारी अपने अंतर्मन में निहित विचारों, शब्दों, सपनों, को साकार और देखने की हिम्मत ही नहीं कर पातीं है, क्योंकि उनको पाता है की साथ कोई देगा नहीं पर रुकिए नारी आज आपको साथ की बैसाखी नहीं ढूंढना है बल्कि अपने हौसले और अपने स्वाभिमान के लिए लड़ना भी है और जीतना भी है,
ये कह देने मात्र से नहीं होगा बल्कि इसके लिए आपको हजारों मुश्किलों से लड़ना होगा

मैंने सेना में उपस्थित महिला ऑफिसर को सुना है,उनसे सीखिये की पहचान और स्वयं को किस तरह हम आगे ला सकते हैं, हमें भी हमारे व्यक्तित्व की चमक से रोशन होना है, और हमें भी स्वयं को समझ कर आत्मनिर्भर, स्वाभिमान हित,वो चमक अपने ईमानदारी की होना ही आपको आगे ले जाती है।
बहुत बहुत धन्यवाद अपने मेरे विचारों को पढ़ा और बदलाव का एक बीज अपने मन में बोया है, इसके लिए आपकी आभारी रहूंगी आपकी नीतू नागर


लेखिका कवियत्री नीतू नागर अम्बर नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (2)

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सरिता पाठक said

नीतू ji आप बहुत अच्छा लिखती हैं आपका लेख पढ़ा मैंने नारी और समाज को जाग्रत करने का वर्णन है लेख में सिर्फ लिखन्तु परिवार द्वारा पढ़े जाने मात्र se समाज में बदलाव नहीं आयेगा इसके लिये आपको अपने लेख को जन जन तक पहुंचना होगा हमारे देश में प्राचीन काल से नारी महालक्ष्मी बाई, महादेवी वर्मा इत्यादि नरियों ने संघर्ष कर अपनी पहचान बनाई और हम सब के लिये आदर्श बनी आज भी नारियां हरछेत्र में आगे बढ़ रही हैं अंतरिक्ष तक पहुंच रही हैं पर हमारे समाज में पुरुष को बचपन से यह सिखाया जाता है कि नारी को सपने देखने और अपनी पहचान बनाने का कोई अधिकार नहीं उसे सिर्फ सजना सवंरना और घर संभालना ही उसका काम है, नारी को भी समझना होगा कि उसकी पहचान बनाना ही उसका श्रगार है उसके लिये उसे चाहे अपनों से ही क्यों ना लड़ना पड़े, अगर मैंने कुछ गलत लिख दिया हो तो माफ कर देना बहन, कुछ ज्यादा हो गया 👌🙏🌹

रीना कुमारी प्रजापत said

Bahut bdhiya 👌👍

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