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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

जीवन एक सफ़र है

#Blog - जीवन एक सफ़र है


.....! हां यही सही है जीवन की सारी रातें काली थोड़ी गुजरेगी, सुबह का सूरज कभी वो खुशी बनकर ज़रूर हमारे रूबरू होगा।
बस हमें यही तो पहचनना हैं,की वो एक दिन आयेगा और उसकी उम्मीद में अपने आज को ना जीना तो,ही आपकी वो पल के बीच बाधा है।
हम आखिर कर क्या रहें हैं? सुबह उठकर काम में लग गये,ना जाने कितने सर पैरों से दिनभर हम गुजरते है,और रात को खाना पीना सोना हो जाता है। हां मानतीं हो इसमें अपने कमाया ज़रूर है ,जिससे आपकी बाहरी (भौतिक) जरूरतें ज़रूर पुरा होगी,पर वो अंतर्मन की शांति,सकुनू कहीं तो मिसिंग है.. पार्थ!

जीवन है सुख दुःख तो आते-जाते रहेंगे और इन दुःख को आप तभी सह पाएंगे,जब हम खुद को समझ लिये हो, जीवन के सफ़र को समझ लिये हो... तभी मुमकिन है,कि अपने कुछ पाया है,कुछ सीखा है,इन रास्तों से,आपके सफ़र की हर ठोकर आपको मजबूत बनाई है ,और ये बताई है कि... जीवन है ऊपर नीचे तो आना जाना है, संसार परिवर्तन का नियम है। इसलिए स्वयं को जानना आपको सफ़र को आसान और सरल बना देता है।

हम सब गौतमबुद्ध के बारे में जानते हैं की उनका माध्यम मार्ग हमें सिखलाता है कि जीवन में आप जब भी सुख दुःख में हो तो खुद को आप इन दोनों पाइंट के बीच रखकर सोचना की थोड़ा दुःख है तो सुख भी आयेगा।

एक दिन की बात है, मैं पुरे दिन पढ़ाई से थकी हारी शाम को जब अपने छत पर जाकर बैठ गई ,और मैंने देखा कि वह पंछी चहक रहे हैं और आसमां भी अपनी लालिमा बिखेर रहा है जहां बहती हुई शीतल हवाओं में वो मेरे मन के सारे विचारों को एकाएक शून्य कर दिया,

वो जो पल था उस समय महसूस किया अपने आपको वर्तमान में जीने का ,सच को देख पाने का , और जो परम शांति सकुनू मिलता है वो पुरी थकावट को मिटा देता है ... हवाओं का स्पर्श मेरे मन को बहुत ही गहरी सांस और खुद को देख पाने की दृष्टि देता है।

मैं छत पर बस चुपचाप घुमते हुये परीक्षण (देखना)कर रही थी, और सब कुछ मेरी नज़रों के समाने से गुजरता है।वो परेशानी जिसको लेकर में बैठा था वो भी धूमिल होती प्रतीक होती है। और समझ आता है की हकीकत और आईना तो जीवन का वर्तमान है जिसमें जिकर हम अपने आपको पा सकते हैं।

निम्न लाइनें जरा गौर फरमाएं!

आवाज़ अंतर्मन की पहचान ले,
तु कौन हे,ये तु जान लें।
एक खोज की कहानी,
जरा खुद में ढुंढना है।

हम हर पल में खुद को मजबूत और खुश रखना है आयेंगे ऐसे पल जो‌ आपको गिरायेंगे, और आपको बहुत सारी चुनौतियों से लड़कर इस जीवन की परिभाषा से रूबरू होना होगा,तुम्हारा खुद का मूल्य महत्व कितना है,ये‌ आपको पता होना चाहिए, क्योंकि आप अपने जीवन को अपनी नज़र से देखों न की लोगों की सुनों।ये चार लोग क्या कहेंगे,ये चार लोग जब आप कुछ बन जाते हैं तो तारीफ वरना वहीं इसलिए स्वयं को जनाना और फिर वक्त के साथ सामंजस्य से चलना इससे खुबसूरत कुछ हो ही नहीं सकता। इसलिए जो पल आज हैं उसमें जिओ, जिंदगी का कोई भरोसा नहीं है जो है आज अभी में है।

यदि समझ लिया सब कुछ तो जीवन में सब सह जाएंगे और चलती इन राहों में सीखते जायेंगे।मेरे विचारों को और ज्यादा मजबूती उस डायलॉग हेना.. "सफ़र खुबसूरत है मंजिल से भी " अपने आप में ये लाइन काफी है.मजिंल तो मुत्य तय है क्यों ना सफ़र को जिया जायें, कुछ अपनों के साथ कुछ स्वयं के साथ
यही जिंदगी है यहां वहीं होगा जो होना लिखा है इसलिए हर पल को जिओ और सीखों।

"हर पल यह जिते रहो,
जो भी हो पल उनमें जिओ,

बहुत बहुत आभार आपका आप सभी ने समय निकालकर पढ़ा और यकीन रखती हूं अगर पढ़ कर अपने अपना समय दिया है तो निश्चित आपको भी मेरे विचारों ने जरूर कुछ तो महसूस कराया होगा।

बहुत बहुत धन्यवाद

Writer - नीतू नागर (अम्बर) मध्यप्रदेश




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