Newहैशटैग ज़िन्दगी पुस्तक के बारे में updates यहाँ से जानें।


Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat


Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.

Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.



The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

Newहैशटैग ज़िन्दगी पुस्तक के बारे में updates यहाँ से जानें।

Newसभी पाठकों एवं रचनाकारों से विनम्र निवेदन है कि बागी बानी यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करते हुए
उनके बेबाक एवं शानदार गानों को अवश्य सुनें - आपको पसंद आएं तो लाइक,शेयर एवं कमेंट करें Channel Link यहाँ है

The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

राष्ट्रीय एकता वर्तमान और भविष्य

विषय - राष्ट्रीय एकता और वर्तमान भविष्य

विधा- मिश्रित


जैसे हम जानते हैं कि आज हमारा भारत विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। ऐसे में हमारा वजूद और पराम्परागत संस्कृति और सभ्यता अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंचती नज़र आ रही है,हमारा विकसित भारत(2047) बनाने का सपना और साथ में गरीबी जैसी समस्या को खत्म करने के लिए सतत् विकास लक्ष्य 2030 के लिए बनाए गए हैं। हमारी भारत भूमि वेदों पुराणों ग्रंथों से पिरोई गई भूमि है जहां एकता अपना रंग बिखराये हुये है।

राष्ट्रीय एकता हमारी भाषा और भाईचारे के साथ हमारे संविधान में भी प्रतिफल झलकता है, हमारे देश की यही पहचान है, जहां बहती हुई शीतल हवाओं हो या नदियों का पवित्र संगम सब एक दूसरे से समांजस्य और सहभागिता से नित ऊंचाईयां को बढ़ते जा रहे हैं,

वर्तमान भारत -
हमारा भारत देश एक तरफ़ जहां विकास की और तीव्र उन्मुख हो रहा है वहीं दुसरी तरफ वैश्विक स्तर पर चलते विद्रोह जैसे रूस यूक्रेन, इजरायल हमास,भारत पाकिस्तान और भी बहुत सारी विद्रोह विप्लव जो इसका नकारात्मक प्रभाव हमारे देश और समाज पर पड़ता है, जहां एकता को भी जवाब देना पड़ता है,, जैसे हाल ही में हुआ अमेरिका का टैरिफ प्लान और भारत की रणनीति ने अपनी सुझबुझ से अपनी संप्रभुता और एकता का परिचय दिया।

कितने ही निशाने लगा लो ,
मेरे भारत देश की मिट्टी है,
ये पानी से नहीं , ख़ून से सिंची है,

आज का युग नित नए नए आविष्कारों से साराबोर है जहां आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता अपने चरमोत्कर्ष पर है,ऐसे में हमारी राष्ट्रीय एकता को खतरा हो सकता है जहां इसका एक पहलू सकारात्मक है तो दूसरा नकारात्मक भी है जिसका प्रभाव हमारी भाषा, संस्कृति, समाज, बच्चें,देश, सभी पर पड़ेगा, हमें इसलिए नये नये आविष्कारों के साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिए उसका सही प्रयोग करना जरूरी है ताकि राष्ट्रीय एकता अखंडता संप्रभुता बनी रहें।

भारत देश की विशेषता रही है की एकता में अनेकता... ऐसे में हमारा कर्तव्य है कि देश को एक अच्छा वातावरण और समाज दें जहां एकता के साथ सब आपस में खिलखिलते रहें।

कुछ लाइन राष्ट्रीय एकता के लिए

की देखा है मैंने वो ग़ुलाम भारत,
देखी है मैंने वो उजाड़ा दामन,
कैसे मेरा देश महान बना है,
सुनो तो सुनाऊं मैं तुम्हें।

वो वल्लभ भाई पटेल का रियासतों को जोड़ना,
वो लक्ष्मी बाई का अंग्रेजों से लोह लेना,
वो गांधी का सत्याग्रह करना,
वो भारत की एकता का झलकना।

हमारा नाम ही काफी है,
ये देश ही काफी है,
यहां की गंगा अमृत की दिवानी है,
यहां का कंकड़ में शंकर है।

की देखा है मैंने वो ग़ुलाम भारत,
देखी है मैंने वो उजाड़ा दामन,

निष्कर्ष - देश में बदलते वक्त के साथ हमें खुद को मजबूत बनाना होगा और एकता के साथ हमें पर्यावरणीय समास्याओं से निपटने का उचित मार्ग ढुंढना होगा और अपने देश को विश्व गुरु बनाने में अग्रसर होना है।


लेखिका कवि-नीतू धाकड़ (अम्बर) नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश




समीक्षा छोड़ने के लिए कृपया पहले रजिस्टर या लॉगिन करें

रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (0)

+

विषय चर्चा श्रेणी में अन्य रचनाऐं




लिखन्तु डॉट कॉम देगा आपको और आपकी रचनाओं को एक नया मुकाम - आप कविता, ग़ज़ल, शायरी, श्लोक, संस्कृत गीत, वास्तविक कहानियां, काल्पनिक कहानियां, कॉमिक्स, हाइकू कविता इत्यादि को हिंदी, संस्कृत, बांग्ला, उर्दू, इंग्लिश, सिंधी या अन्य किसी भाषा में भी likhantuofficial@gmail.com पर भेज सकते हैं।


लिखते रहिये, पढ़ते रहिये - लिखन्तु डॉट कॉम


लिखन्तु - ऑफिसियल

बुभुक्षा के अष्ट पर्व

Feb 24, 2024 | कविताएं - शायरी - ग़ज़ल | लिखन्तु - ऑफिसियल  | 👁 40,224
लिखन्तु - ऑफिसियल

गुलज़ार साहब की ग़ज़लें भाग-1

Jan 24, 2026 | बहुचर्चित | लिखन्तु - ऑफिसियल  | 👁 124,281
LIKHANTU DOT COM © 2017 - 2026 लिखन्तु डॉट कॉम
Designed, Developed, Maintained & Powered By HTTPS://LETSWRITE.IN
Verified by:
Verified by Scam Adviser
   
Support Our Investors ABOUT US Feedback & Business रचना भेजें रजिस्टर लॉगिन