विषय - विश्वगुरु भारत - राष्ट्र एवं संस्कृति की गौरवगाथा "
विधा - लेख
हमारी भारत की संस्कृति बहुत प्राचीन है इसका उदय हड़प्पा सभ्यता के साथ वैदिक काल में फलीभूत हुआ है और वक्त के साथ सामंजस्य से संस्कृति और इतिहास में भारत की गौरवगाथा और बलिदानों से परिपोषित है।
यहां की मिट्टी मिट्टी नहीं सोना है, और वो मिट्टी बलिदानों से परिपोषित है और ये भारत देश तर्पण की चमक है वीरों की पहचान है पहाड़ों और जंगलों के रास्ते और वो जम्मू कश्मीर का इतिहास अपने आप में बलिदानों की गाथा है।
आज भारत २१वीं शताब्दी में बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला देश है और विकास की और प्रतिदिन उन्मुख है ,ऐसे में मेरा देश अब विश्व गुरु की ओर चमक रहा है,
हमारी संस्कृति में चरक सुश्रुत जैसे महान व्यक्तित्व जिसने मेडिकल लाइन में बहुत अच्छा किया,
और मेरा भारत अब महिलाओं को भी उच्च स्तरीय बैठक में शामिल कर रहा है जहां देश की सर्वोच्च कुर्सी एक महिला राष्ट्रपति जी सम्हाल रहीं हैं और हर क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण बड़ रहा है। और ऐसे में ही "यत्र नारी पूजन्ते रमन्ते तत्र देवता "और हम विश्वगुरु तभी बनेंगे जब हमारे देश की बेटियां सुरक्षित रहें,हर नारी शक्ति को स्वतंत्रता से उड़ान भरे।
और हमारी संस्कृति और इतिहास सभ्यता और संस्कार सभी का समांजस बहुत अच्छा है,
और हमारे भारत देश में वीरों का पराक्रम और शौर्यहमेशा अपनी पहचान दिखाता आया है,इसी परिप्रेक्ष्य में निम्न लाइनों में समां बंधियेगा,,
"मेरा देश हिंन्द का प्यारा,
वीरों की बलिदानों की गाथा,
संस्कार और संस्कृति में,
करता ये विश्वास को कायम,
गौरवशाली इतिहास हमारा,
प्राचीन परंपरा न्यारी है,
सबको सुखी बनाना अपनी ,
वेदों की ये वाणी है,
आओ अब मिलकर चलें,
भारत को विश्वगुरु करें।
हमें मिलकर अपनी देश की सरकार और नागरिक के साथ सामंजस्य से देश की हर परेशानी दूर करके भारत को विश्वगुरु बनने वाले रास्ते को करीब लाना है।
मेरा देश में जहां एक ओर अतिथि देवो भव है तो एक ओर वसुदेव कुटुंबकम् का अक्षरष सत्यता हमारे विचार और विश्वास को संबोधित करके संस्कृति को उजागर करती है।
आइये एक कदम देश के लिए चलें सबका साथ दें और देश की स्वायत्तता और देश की गरिमा के लिए सबको आगे लेकर बढ़े। और समाज को अच्छे मूल्यों से सजाएं और सुरक्षित वातावरण का निर्माण करें।
लेखिका कवि-नीतू धाकड़ अम्बर नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश


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