विधा -कविता
शीर्षक - मैं नारी हूं तो.!?
"नारी हूं मैं ममत्व हूं,
मैं गोद विशेष हूं।
बलिदानों से परिपोषित में,
नारी विशेष हूं।
हे सादगी मेरी यही,
संस्कार मेरा है।
उड़ती फिरूं नभ तल में,
आसमां मेरा है।
इज्ज़त मेरी सपना मेरा,
किरदार अशेष है।
हूं मां पत्नी बेटी में,
हर रूपों में विशेष हूं ।
बच्चों के लिए अपने सपने,
भूल जाती है।
परिवार वास्ते वो,
गम भी सह जाती हूं।
हर पीड़ा को हंसकर,
यूंही सह जाती हूं।
हर दर्द में बच्चों को,
मां हंसकर दिखाती है।
नारी हूं मैं ममत्व हूं,
मैं गोद विशेष हूं।
बलिदानों से परिपोषित में,
नारी विशेष हूं।
लेखिका कवि-नीतू धाकड़ अम्बर नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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