शीर्षक - आंसू
आंसू वो मलाल है मेरे मन का जो,
आंखों से बहा होगा।
दिल में पला होगा तो,
अंतर्मन में घुटा होगा।
हां ये अश्रु निकले हैं,
कोई तो टुटा होगा।
जैसे दशरथ जी के आंसु,
पुत्र वियोग में निकले होंगे,
वो एक खालीपन का तनाव,
अश्रु बनाकर निकाल होगा।
वो आंखों का झलक नीर सदा,
दुःख दर्द बनकर उभरा होगा,
आंखों को मौका रोने का ,
अश्रु जल ने दिया होगा।
आंसू रोया जब मैं अकेला,
खुद को मजबूत बनाया है,
हर आंसू की बूंदों ने,
मुझको एहसास दिलाया है।
हर आंसू में वो स्वाद नमक सा,
मुझको ये सिखलाता है,
बनों नमक सा तुम भी जरा,
जो खाने का स्वाद बढ़ता है।
आंसू वो मलाल है मेरे मन का जो,
तन से झरा होगा,
झरनों से गिरा होगा,
तकिये से लिपटा होगा,
आंखों से मुंह तक आया होगा।
लेखिका कवियत्री नीतू नागर अम्बर नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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