नदिया सा बहता मन
तेरी ओर ही जाए,
सूनी दिल की राहों में
तेरा दीप जलाए।
भीगी मिट्टी सी ख़ुशबू
तेरी साँसों में मिलती,
सूखे पत्ते जैसी रूह
छूते ही फिर खिलती।
चाँद अधूरा लगता है
तेरे बिन इस रात में,
जैसे कोई गीत रुका हो
दिल की धीमी बात में।
नदिया सा बहता मन
तुझमें घर कर जाए,
तेरी बाँहों की बारिश में
हर दर्द उतर सा जाए।
तेरी हँसी की सरगम
मन में यूँ उतरती है,
सूनी पड़ी हवाओं में
जैसे धूप बिखरती है।
तेरी याद की चादर
ओढ़े रहती शामें,
तेरे नाम से महकी हैं
मेरी सारी राहें।
कभी जो तू पास रहे
वक़्त वहीं रुक जाए,
नदिया सा बहता मन
तेरी धुन बन जाए।
डॉ अखिलेश श्रीवास्तव


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







