महावीर की पुकार
शिवानी जैन एडवोकेट Byss
आज खड़ा है विश्व खौफ के काले साये में,
जी रहा है हर शख्स यहाँ मौत के साये में।
सरहदों पर बारूद का भारी ढेर लगा है,
इंसानियत को लीलने का खूनी खेल जगा है।
विज्ञान की शक्ति अब विनाश का साधन बनी,
परमाणु की होड़ में धरती की सांसें तनी।
मिसाइलों की नुमाइश में गौरव ढूंढ रहे,
शांति के कपोत को पिंजरे में मूँद रहे।
तभी याद आती है कुंडलपुर के उस वीर की,
जिसने बदली थी धारा समय और तकदीर की।
महावीर का 'जीयो और जीने दो' का नारा,
आज बन सकता है इस डूबते जग का सहारा।
अहिंसा का मार्ग ही अब एकमात्र विकल्प है,
शांति का संकल्प ही विनाश का कल्प है।
शस्त्रों की इस अंधी दौड़ को अब रोकना होगा,
अहंकार के इस बढ़ते विष को टोकना होगा।
त्याग और अपरिग्रह का जो पाठ पढ़ाया था,
महावीर ने ही तो सच्चा धर्म सिखाया था।
छोड़ो ये बारूद और करुणा की राह चुनो,
प्रेम और सद्भाव के नए रेशमी ख्वाब बुनो।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







