उम्र के आखिरी पड़ाव पर,
ज़िंदगी की आखिरी शाम पर,
साजन ने पूछा हमसे—
ज़िंदगी से तुमको कोई शिकायत तो नहीं।
हम कुछ ना बोले—
ख़ामोश निगाहों से
देखकर उनकी तरफ,
सिर्फ मुस्करा दिए।
— सरिता पाठक
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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