(बाल कविता)
शादी का पंडाल
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चम-चम-चम-चम चमक रहा है
शादी का पंडाल।
नीली-पीली, टिम-टिम बिजली
लगती बड़ी कमाल ।।
डीजे के गाने पर नाचें
हाथी घोड़े शेर ,
झूम रहे हैं मस्ती में सब
तीतर मोर बटेर,
चींटी ने दुल्हन का जोड़ा
पहन लिया है लाल।
चम-चम-चम-चम चमक रहा है
शादी का पंडाल।।
लस्सी, पूड़ी, नानखटाई
मेवा, रबड़ी, खीर ,
छोला, बर्फी, दूध-मलाई,
सेब और अंजीर ,
गरमागरम जलेबी के संग
रसगुल्ले की थाल।
चम-चम-चम-चम चमक रहा है
शादी का पंडाल।।
आगे गाड़ी, पीछे गाड़ी
दूल्हे की बारात,
भालू-बन्दर लेकर आए
बड़ी-बड़ी सौगात ,
शादी करके चींटी अपने
पहुँच गई ससुराल।
चम-चम-चम-चम चमक रहा है
शादी का पंडाल।।
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~राम नरेश 'उज्ज्वल'
उज्ज्वल सदन
मुंशी खेड़ा,(अपोजिट एस-169
ट्रांसपोर्ट नगर), एल.डी.ए. कालोनी,
लखनऊ-226012
मो : 07071793707


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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