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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

क्या यही नया साल है

गीत अभद्र,प्रीत अभद्र
युवा उम्र की रीत अभद्र
निश्छल कोमल मनोभाव का
सबके मन में शून्य कद्र
ऐसी खुशियां किस काम की
जहां क्लब ही मालामाल है
क्या यही नया साल है
अभद्र संगीत पर अभद्र नृत्य
शोर शराबे में ही अभद्र कृत्य
हाथों में है मदिरा ही मदिरा
युवा मन की आनंद मिथ्य
संस्कृतियों को कुचल कुचलकर
कहते हैं कमाल है
क्या यही नया साल है।
नशे नशे में नाच रहें हैं
अस्मिता की करके चिथड़े
धुंओं का रंगीन पर्दा
थिरकते पांव ताल बिगड़े
पैसे वाले कहते हैं
ये जश्न बेमिसाल है
क्या यही नया साल है?


यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है


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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (11)

+

जयश्री विलास जोधंळे said

सुदंर रचना खुशीयाँ को मनाने का तरिका बदला जा सकता है

ललित दाधीच said

वाह वाह बहुत सही तमाशा मारा है आपने इन हद से ज्यादा अमीरों को 😃😃😂❤️❤️❤️

सरिता पाठक said

अति सुन्दर अति सुन्दर रचना नयी जनरेशन का जश्न मनाने का यह तरीका उन्हें बर्बादी की ओर ले जा रहा है पर क्या कर सकते हैँ दुनिया का चलन बदल गया है एक अकेला व्यक्ति इसको नहीं बदल सकता नव वर्ष मनाने का यह ढंग 👌🙏

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

जयश्री जी, ललित जी, सरिता बहन, इतनी सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए हृदय से धन्यवाद आभार, सही को सादर प्रणाम 🙏🌹🙏

रीना कुमारी प्रजापत said

बहुत सुंदर सवाल

रीना कुमारी प्रजापत said

likhantuofficial@gmail.com
आदरणीय से निवेदन है कि इस ईमेल पर अपना परिचय भेज देवें।

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

रीना जी सादर प्रणाम करता हूं, धन्यवाद आभार 🙏🌹 नये साल की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🌹 परिचय भेजूंगा 🌻🌻

आलम-ए-ग़ज़ल - परवेज़ अहमद said

वाह! बहुत ही ज़बरदस्त रचना! लाजवाब! बे-मिसाल! नये साल की ढेरों बधाईयाॅं और शुभकामनाऍं! आदाब, मनोज जी! 💐💐❤️🙏🙂

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

परवेज जी तहे दिल से शुक्रिया नमस्कार ❤️❤️

सुप्रिया साहू said

आजकल के युवा तो शराब से ही अपना चेहरा धोते हैं सर जी, पता नहीं शराब पीकर ही जश्न क्यों मनाना होता है इन्हें, अपने आसपास के परिवेश को देखते हुए लिखा गया एक वास्तविक एवं बेहद खूबसूरत रचना 👌👌, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

सुप्रिया जी। रचना को इतना शिद्दत से पढा और सुन्दर समीक्षा दी, हृदय से धन्यवाद आभार नमस्कार 🙏🙏🙏🙏

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