ये कैसा करिश्मा किया तूने मेरे रब...
बिना कुछ किए गुनाहगार हो गए,
हमने तो आपको दूर से देखा था,
देख के ही तुमको हम बदनाम हो गए,
ये बदनामी कैसे मिली हमको हम समझ न पाए,
जब समझे हम इस बात को हम पूरा बिखर गए,
ये जिंदगी अब किस काम का है दोस्त,
कुछ किए नहीं और पूरी तरह से टूट गए,
बड़ी ही ज़ालिम है इस दुनिया के सब लोग,
जीना तो चाह रहे थे मगर हम मर ही गए,
क्या करेगी अब सुप्रिया उनको सताकर भी,
न चाहते थे हम बनना मगर भूत बन ही गए...।।
- सुप्रिया साहू


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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