संसार का सबसे सुंदर शब्द "आदत" है,
ये जिसे हो जाएँ,
वो भले खुद छूटे,
ये ना छूट पाए,
तब इसका परिवार उनका बनाओ,
जो तुम्हें बनाए,
मेहनत की आदत ले लो,
कहीं भी जाओगे,
घबराए नहीं फिरोगे,
सुकून की आदत ले लो,
अन्दर बाहर और तुम,
जीवंत जोड़ी बने रहोगे,
ज्ञान की प्राप्ति आदत ले लो,
खुद को भटकने नहीं दोगे,
ना बोलने की आदत ले लो,
हाँ की परिपक्वता रहेगी,
सत्य की आदत ले लो,
कर्म की चिंता कम रहेगी,
मिलनसार की आदत ले लो,
सब में रोशनी दिखने लगेगी,
आदत तो फिर कहीं हैं,
ले लेने को,
पर चयन की आदत ले लो,
तुम्हें कम आदत अपनाने के बाद भी,
संतुष्टि मिलेगी,
है आदत तो बहुत,
पर करना नहीं,
इसमे होना पड़ता है,
आदतें ले लो,
ये हैं,
जीवन, समय की,
नींद की, आँखों की,
अस्तित्व की, विस्तार की,
न्याय की, इंतजार की,
प्रेम की, समानता की,
दृष्टि की, समझ की,
अन्य अन्य,
क्या क्या लिखूँगा,
आदत की भी आदत ले लो,
जैसे मौत को है,
सबकी आदतें ले ली,
जहाँ किसी आदत को मर्जी की इजाजत नहीं,
आपके पास भी सूची है आदतों की,
सबके पास है,
पर चयन करें,
क्यूँकी आपकी जगह,
स्थान, घर, परिवार,
समाज, संस्कृति,
कर्म का क्रम,
बहुत आदतों को,
काला कर देगा,
आप अपनी आदतों को देख सकें,
आदत आपको देख सकें,
वही आदतें ले लो,
शब्दों पर मत जाओ,
क्यूंकि ये करने को कहते हैं,
होने को नहीं,
आपको होना है,
जीवन हर वैसा नहीं है,
पलट जाता है,
आदतें महँगी है,
शौक नहीं है,
लेन देन की पक्की है,
अतः इतनी आदतें लो,
जो आपको सुन्दर करें,
मेरा क्या बोलकर,
किसी के मन में बुदबुदाहट नहीं करनी है,
बस आदत होना,
किसी के होंठों पे, लफ़्ज़ों पे,
कहीं मुझे सुधरना नहीं है,
बस ठीक सुंदर रहना,
ताकि मेरे कहे शब्दों को,
बड़बड़ाता रहे, इतना ठीक है।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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