इल्ज़ाम सच्चा हों तों क्या गवाही दे क्या फैसला करे
फिर तों जो चाहे सज़ा मिले उस पऱ ही हौसला करे
उझड़ा भी तों वो आसियाना जिस में जान बसती थी
पंछी फिर क्या तों दिल लगाये और क्या घोंसला करे
तौहमते अपनों की थी तों क्या मुख़ालफ़त करते हम
दिल घर में मर गया तों क्या जीने का ढकोसला करे
मज़ाक़ बन जाएगा हमारा और हमारे अहसासों का
मसला हमें सुलझाना है तों क्यूँ इकठ्ठा मौहल्ला करे
ख़ाक़ भी हों जाए तों भी दिल-आज़ारी कम न होंगी
तों क्यूँ इनकी वजह सें ख़ुद क़ो अंदर सें खोखला करे
कृष्णा क़ो सबर आगया वो किसी के लिए ख़ास नहीं
किससे शिकायत करे और किस बात पऱ मसला करे...
-कृष्णा शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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