समय की धीमी धूप में
कुछ चेहरे फीके पड़ जाते हैं,
कुछ आवाज़ें यादों में घुलकर
सिर्फ गूंज बन जाती हैं।
कल तक जो हाथ थामे थे,
आज वही दूर किनारों पर खड़े हैं,
बिना कुछ कहे, बिना कुछ सुने,
जैसे कोई अधूरी बात
हवा में अटक गई हो।
रिश्ते भी मौसम जैसे होते हैं
कभी सावन की भीगी खुशबू,
तो कभी पतझड़ की सूनी सरसराहट,
हम सोचते हैं ये ठहरेंगे सदा,
पर ये भी समय के संग बह जाते हैं।
छूटते साथों की इस भीड़ में
एक सन्नाटा भी साथ चलता है,
जो हर हँसी के पीछे
चुपचाप अपना घर बना लेता है।
फिर भी…
हर टूटन के भीतर
एक नया साहस जन्म लेता है,
हर बिछड़न सिखा जाती है
खुद से मिलने का रास्ता।
क्योंकि अंततः
रिश्ते बदलते हैं, लोग छूटते हैं,
पर जो बचता है,
वह है अनुभवों की गहराई
और दिल का वह कोना
जो अब भी उम्मीद से भरा है।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







