जब हवा के बदलते रूख में भी
सांसें चलना नहीं भूलतीं,
तो ज़िन्दगी के बदलते रंगों में
तुम घबराकर क्यों ठहर जाते हो?
डर को हराकर ही तुम
जीत की सीढ़ियाँ चढ़ सकते हो..
वन्दना सूद
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







