तू ही पहला और आखरी प्यार है मेरा,
क्या तू सबसे खास अपनों में कभी मुझे
सबसे पहले रखेगा।
बहुत बड़ा सपना देखा है मैंने साथ रहने का तेरे,
क्या तू मेरे इस सपने को कभी पूरा करेगा।
मुकरेगा तो नहीं तू अपनी बातों से,
हमारे आशियाने में मुझे अकेला छोड़
अपनों के पास तो नहीं लौट जायेगा।
नहीं चाहा मैंने कभी की तू दूर हो उनसे,
पर उन्होंने जो किया तेरे साथ
नफ़रत हो गई है मुझे अब उनसे।
तेरे साथ क्या हुआ बखूबी जानता है तू
फिर भी उन्हीं के साथ रहना है तो
कोई आपत्ति नहीं मुझे,
तू मेरी वजह से कभी किसी से दूर मत होना
दिल हो तेरा मेरे पास आने का तो ही आना।
मेरा क्या है मैं तुझसे बस बात कर भी
जीने की कोशिश कर लूंगी,
तू कभी मेरी खुशी के लिए अपनी खुशी या
अपनों को कुर्बान मत करना।
हाँ तकलीफ बहुत होती है मुझे
तुझसे बहुत प्यार जो करती हूँ,
पर सह लूंगी, दूरी बर्दाश कर लूंगी
बस तू हमेशा सलामत रहना।
अपने पराये सभी ने हाथ छुड़ा लिया
एक तेरा ही आसरा है मेरा बस,
तू हमेशा साथ निभाते रहना।
✍️ रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी'✍️
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







