बसा नहीं कोई दिल में, किसका इन्तजार
कोई सामने है कहाँ मेरे, जिस से इजहार करूँ
किसी से उलझने को, कर रहा है दिल
मगर मैं यहाँ किस से तकरार करूँ
बे-रंग जिन्दगी में, भरने के लिए रंग
अब मैं ईश्वर से, इल्तिज़ा बार-बार करूँ
कोई पास नहीं मेरे, मुझे देखने के लिए
तो अपना, ये रुप, मैं कैसे सिंगार करूँ
दिख रहे है यहाँ, अनेक सुन्दर रुप सामने मेरे
अब सोच में है दिल, मैं किसका दीदार करूँ,
जब हुआ ही इश्क़ किसी से सुप्रिया
तो अब यहां मैं , किससे में प्यार करूँ....।।
- सुप्रिया साहू


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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