विषय: ऐ जाते हुए लम्हों ज़रा ठहरो
दिनांक:29/12/2028
ऐ जाते हुए लम्हों ज़रा ठहरो हमे भी कुछ ऐसा करना है।
स्वर्ण अक्षरों में नाम लिखे जीवन में कुछ ऐसा करना है।
जीवन प्यारी सौगात प्रेमपूर्वक अभिलाषा पूर्ण करना है।
सोच समझकर जीवनपथ पर कदम संभलकर रखना है।
नादानी ना करना यूं भटकना नहीं जादूगर सा बनाना है।
एक एक कदम सही दिशा में रखना मंजिल तक जाना है।
धरती पर पैदा होकर सपना सच करो चांद तक जाना है।
धन्य धन्य मात पिता जिन्होंने हमको कठिनाई से पाला है।
मात पिता के ऋणी हो अब तक तुमने क्यों नहीं जाना है।
आभार प्रगट करने का सोचो जीवन व्यर्थ नहीं करना है।
कुछ करना है कुछ करना है संघर्ष लगातार ही करना है।
मातृ भूमि के ऋण को भी इस जीवन में ही हमे भरना है।
धर्म अर्थ की रक्षा करना जीवन का बस यही सपना है।
वीर योद्धा बने सब इंसान क्योंकि भारत देश अपना है।
जीवन पथ पर सही डगर पर आहिस्ता से हमे चलना है।
भूल भुलैया में हम ना भटके ये संकल्प मन में रखना है।
सत्यवीर वैष्णव बारां राजस्थान
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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