जो आसानी से मिल जाए।
उससे तसल्ली कैसे आए।।
मैं अपनी फितरत से हैरान।
जो दूर बहुत उसे कैसे पाए।।
मन अपनी पर आए 'उपदेश'।
तो बेताबी आसमान ले जाए।।
बेवस हुई क्या-कुछ सोचकर।
सब्र की नाव किनारे ले जाए।।

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
जो आसानी से मिल जाए।
उससे तसल्ली कैसे आए।।
मैं अपनी फितरत से हैरान।
जो दूर बहुत उसे कैसे पाए।।
मन अपनी पर आए 'उपदेश'।
तो बेताबी आसमान ले जाए।।
बेवस हुई क्या-कुछ सोचकर।
सब्र की नाव किनारे ले जाए।।
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