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Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

मैं अकेला कहां हूं

मैं अकेला कहां हूं

कहते हैं सब, कि अकेला हूं मैं
बताओ मुझे मैं अकेला कहां हूं

करती हैं बातें ये मुझ से हवाएं
लिपटी हैं गले में ये मेरे लताएं
सहलाती हैं गालों को यह डाली
बताओ मुझे मैं अकेला कहां हूं

ये पत्तों की सरसर, गाती है यूं
भंवरों की गुनगुन लुभाती है यूं
मुस्काती है कलियां मुझे देखके
बताओ मुझे मैं अकेला कहां हूं

खुशियां और गम, हैं साथी मेरे
ये तन्हाई भी संग रहती है मेरे
कोई जिन्दगी में, कमी है कहां
बताओ मुझे मैं अकेला कहां हूं

बस्ती वालों से मेरी बनती नहीं
जिन्दगी बिना झूठ चलती नहीं
ये सच को कहां पूछता है कोई
बताओ मुझे मैं अकेला कहां हूं

छल और धोखे, दिये तूने मुझे
काम आएंगे ये, कहां अब मुझे
और क्या दोगे न जाने मुझको
बताओ मुझे मैं अकेला कहां हूं

जो उपहार तुम ने दिए हैं मुझे
करूंगा मैं क्या ये बता दो मुझे
ले लो वापस तुम इनको यादव
बताओ मुझे मैं अकेला कहां हूं


यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है


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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (9)

+

ललित दाधीच said

वाह क्या बात है, बहुत खूबसूरत बयां ❤️❤️❤️❤️

Lekhram Yadav replied

आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद सर,आपको सादर नमस्कार।

सरिता पाठक said

बहुत खूबसूरत रचना सर जी ko सादर नमस्कार 👍🙏

Lekhram Yadav replied

आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद एवं स्वागत सरिता जी आपको सादर नमस्कार

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

वाह क्या बात है 👌👌🙏 एक तरफ तो प्रकृति से आत्मीयता और संगति दूसरी तरफ लोगों की प्रवृत्ति से यारी फिर कोई अकेला कैसे हो सकता है। बस्ती वालों से मेरी बनती नहीं, जिंदगी बिना झूठ चलती नही। प्यार, नफरत,छल,धोखे, भैया जी ये सब तो जिंदगी का हिस्सा है। सादर प्रणाम 🙏🌹🙏🙏

Lekhram Yadav replied

भैया जी आपने हमारी भावनाओं को पंख लगा कर। में कृतार्थ किया,आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद एवं सादर नमस्कार

कृष्णा शर्मा said

सत्य, सुंदर सब समाहित...
बहुत खूबसूरत रचना 👏👏👏
सादर प्रणाम 🙏

Lekhram Yadav replied

आपका पुनः स्वागत है कृष्णा जी, आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद एवं सादर नमस्कार

सुप्रिया साहू said

वाह वाह वाह....प्रकृति को पूरा लपेट लिए इस प्रकृति के साथ साथ हम भी आपके साथ हैं और आप अकेले बिलकुल भी नहीं हैं, बहुत खूबसूरत रचना सर 👌👌, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

Lekhram Yadav replied

आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद सुप्रिया जी आपको सादर नमस्कार

रीना कुमारी प्रजापत said

Waah kya baat hai bahut sundar... Bilkul shi aap bilkul bhi akele nhi Hain

Lekhram Yadav replied

आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद आपको सादर नमस्कार

कमलकांत घिरी said

बहुत खूब सर जी वैसे आप सच में अकेले नहीं है सर जी आपके साथ मां सरस्वती का आशीर्वाद है तभी तो देखिए न कितनी अच्छी अच्छी गीत और ग़ज़लें लिख लेते हैं आप, आपको मेरा सादर प्रणाम सर जी🙏🙏🙏

Lekhram Yadav replied

आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद कमलकांत भाई आपको सादर नमस्कार

आलम-ए-ग़ज़ल - परवेज़ अहमद said

निहायत ही ख़ूबसूरत और उम्दा कलाम! बे-मिसाल लिखा है आपने! जितनी तारीफ़ करूॅं वो कम है! बहुत ख़ूब! बहुत ख़ूब! आदाब अर्ज़ है, यादव जी! 👌👏❤️🙏😊

Lekhram Yadav replied

आपकी जर्रे नवाजी है हुजूर वरना हम क्या है आपके सामने, आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद एव आदाब।

वन्दना सूद said

हृदय स्पर्श करती रचना 👌👌👏👏

Lekhram Yadav replied

आपका बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद वन्दना जी, आपको सादर नमस्कार

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