उनकी नज़र सा कोई खंजर नही देखा।
नैन से नैन लड़े भयंकर बवंडर नही देखा।।
वो हँसती रही जाने किस बात का असर।
मैंने झाँककर कभी अपने अन्दर नही देखा।।
मोहब्बत करने वाले दुआ भी करते होंगे।
पूरे घर में घूमकर कहीं मन्दिर नही देखा।।
किसका इंतजार करते करते अँधेरा हुआ।
करीब से उन आँखों में समुन्दर नही देखा।।
क्या सोचकर ज़ख्म हरे कर लिये 'उपदेश'।
उसकी उधेड़बुन में गुजरा नवंबर नही देखा।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







