खोल के बैठी है
खोल के बैठी है अब, ये किताब जिन्दगी
ले रही है अपना अब, ये हिसाब जिन्दगी
किस ने लिया है क्या, किस ने दिया है क्या
ले रही है अपना अब, ये हिसाब जिन्दगी
जबाब जिस सवाल का है मिला नहीं कभी
अब दे रही है उसका भी ये जबाब जिन्दगी
किसने किये हैं पुण्य, किसने किए हैं पाप
गिन-गिन के ले रही है ये हिसाब जिन्दगी
किस ने किए हैं छल, किसने दिये हैं गम
ना जाने देगी किसको, ये खिताब जिन्दगी
बांट दो तुम प्यार से ये अपनी हर खुशी
कहती है आप सब से, ये जनाब जिन्दगी
कुछ कर्म अब अच्छे, तुम कर लिया करो
वरना सजा दे जाएगी, ये बेहिसाब जिन्दगी
कह रहे हैं तुम से यादव, जरा सोच कर देखो
अब करना मत खराब, ये जनाब जिन्दगी
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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