कविता : हमारा समाज....
जो औरत बहुत
ही दुखी हो
जो औरत प्यासी
और भूखी हो
जिस औरत के
कपड़े भी फटे हों
जिस औरत के दिन
मुश्किल से कटे हों
उस पर किसी की
नजर जाती नहीं
उस पर तो किसी की
भी दया आती नहीं
मगर जो औरत कपड़े उतार
अर्ध नग्न हो कर नाचती है
आज का हमारा समाज
उस पर ही पैसा फेंकती है
आज का हमारा समाज
उस पर ही पैसा फेंकती है.......
netra prasad gautam


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







