खामोशी में भी विदाई के दर्द चुभते है।
अब जिस्म को कफन के लिबास फबते है।।
सजा दो डोली विदाई का मुहूर्त आया है।
न रोको मुझे अब बंधन बेहिसाब चुभते है।।
विदाई की रीति न जाने कब से चली आई।
श्मशान मेरी मंजिल है आत्मसात चुभते है।।
कंधों पर उठा लो मेरे पाँव बोझिल हो गए।
अश्क न बहाना 'उपदेश' जज्बात चुभते है।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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