खुशी बड़ी हो या छोटी
एक विचार आपको कभी कभी सत्य बता सकता है, ऐसे ही मेरे साथ चार दिन पहले एक विचार बुध्दि, विवेक, मस्तिष्क और अचेतन से चेतना में कुलबुलाहट करता मेरे पास आया, बोला खुशी और ये सुख लंबे दिनों तक, या भारी होने पर बड़ी जीत पर या तरक्की पर इतना खुशी क्यों नहीं देता है जबकि जब हम कोई छोटे-छोटे काम करते हैं, खेल खेलते हैं, कुछ अपने स्तर में सुधार कर लेते हैं, कोई छोटे समारोह में भाग लेते हैं या कोई ऐसा काम जिससे ज्यादा प्रभाव ना हो पर बड़ी खुशी देता है ऐसा क्यों? मौन था पर कुलबुलाहट थी पर और सोचा , मंथन किया तब ज्ञात हुआ कि बड़ी चीज़ों में, परिस्थितियों में और उसके प्रभाव में जिम्मेदारी ज्यादा है, और उस पर हमारी व्यक्तिगत नजर कम होती है, उसमें क्या सभी व्यक्तिगत रूप से जुड़े हैं या ये आशंका रहती है, कोई काम का परिणाम किसी के लिए अच्छा है वहीं किसी के लिए बुरा, और छोटी-छोटी बातों, चीज़ों और अमुक परिस्थितियों में हम व्यक्तिगत रूप से शामिल होते हैं, हमने वहां काल के साथ काम किया है बड़ी में तो हमारा ही काल निश्चित है, पर बात अब ईश्वर और ब्रह्म की करें तो वो सुख दुःख में समानता क्यों करता है, आज पता चला, आज मतलब करीब 6 बजकर 43 मिनट पर, कि जो ईश्वर है उसे पता है कोई भी बड़ा काम हो लेकिन उसकी बड़ी खुशी नहीं हो सकती है क्योंकि हर पल कोई ना कोई जीव, प्राणी मरता, कोई भूखा सोता है, किसी के साथ अन्याय होता, कोई आत्महत्या करता है, कोई कमजोर होता है, कोई मनुष्य होकर भी निष्क्रिय रहता है, कोई जानवर किसी किसी दूसरे जानवर को मार देता है, कहीं मूखर्तापूर्ण व्यक्तित्व प्रकृति की परिभाषा देते हैं कोई जीया भी भिखारी की तरह और मरा भी भिखारी की तरह, किसी लड़की या नन्हे बच्चों का शोषण हुआ, कहीं लोकसेवक सरकारी पद के आने के बाद आवाज उठाना बंद कर देते हैं, और भी बहुत से दुखों को देखकर ईश्वर स्थिर ही रहते हैं क्योंकि हर पल के पल में कुछ ना कुछ विनाश या अनिष्ट हो रहा है, लेकिन वही ईश्वर छोटी से छोटी जीव जब भोजन पाता है, जीवन बचा लेता है या प्राकृतिक में अपना काम करता है तो बहुत खुश होता है, उस जीव की खुशी और सफलता को देखकर ईश्वर उसके मन में और जीवन बहुत खुश होता है और वैसे मनुष्य अपने परिवार का पालन पोषण कर लें, खुद अपने अस्तित्व की रक्षा कर लें, अपने जीवन को बचा ले, ये पृथ्वी खोज स्थल है यहां आपका जो क्षेत्र है उसमें खोजें करो अगर मनुष्य वो खोज कर , और अधिक से अधिक जानकारी मनुष्य खुद व्यक्तिगत स्तर पर जान ले, तो ईश्वर को अपने मस्तिष्क में खुशी मिलती है, अतः ये मोक्ष ही है की जीवन बचाओ, खोज करो, खुद पढ़ो जानकारी लो, अपना और सामने वाले का अस्तित्व, अस्तित्व की तरह रहने दो, छोटी छोटी बातों पर मुस्कान रखो, बड़े स्तर पर काम करो, वहां स्थिर रहो, अपनी भूमिका निभाओ, हर मनुष्य को उच्च स्तर की शिक्षा मिले, राजनेता लोग आज के समय अनपढ़ है इसलिए देश की दुःखी करते हैं, अपनी खुशी का प्रभाव बड़े स्तर पर छोड़ते हैं, ऐसे लोग तामसिक है जो शिक्षा नहीं लेते हैं वो मनुष्य नहीं है क्योंकि हमारा तन मनुष्य शरीर है पर मन उस चक्र से घूमकर आया है जो जानवरों का था उसे शिक्षा ही मनुष्य मन बना सकती है, बाकी आपकी मर्जी।।_**


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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