👉 बह्र - बहर-ए-हज़ज मुसम्मन अख़रब
👉 वज़्न - 221 1222 221 1222
👉 अरकान - मफ़ऊल मुफ़ाईलुन मफ़ऊल मुफ़ाईलुन
इस इश्क़-मोहब्बत ने फ़रहाद किया मुझको
था काम का मैं इंसाँ बर्बाद किया मुझको
जब वक़्त मुवाफ़िक था सब यार भुला बैठे
सबने ही जरूरत में बस याद किया मुझको
तक़लीफ़ हुई जितनी सब हँस के सही मैंने
जीवन में मिले गम ने फौलाद किया मुझको
बेफ़िक्र कभी हम भी रहते थे ज़माने में
चाहत ने तेरी जानाँ शब-ज़ाद किया मुझको
कैसे में कहूँ मुझको गैरों ने गिराया है
अपनों की ही साज़िश ने बर्बाद किया मुझको
बिन शब न कटे तेरे अब हो न सहर मेरी
यूँ तुमने सनम अपना मो'ताद किया मुझको
मायूस किया सबने बस दर्द दिया सबने
इक तेरी मुहब्बत ने जाँ "शाद" किया मुझको
👉 फ़रहाद - ख़ुश
👉 मुवाफ़िक - अनुकूल , favorable
👉 शब-ज़ाद - रात में जागने वाला, (insomniac)
👉 मो'ताद - आदी/लती (Addicted/Habituated)


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







