चलो हम एक हैं कि ईश्वर एक है।
हम सबसे इसका जवाब पूछते हैं।
आने जाने वाले लोगों से पूछते हैं।
पेड़ नदी पोखर झील से पूछते हैं।
पशु पक्षी कीट पतंगो से पूछते हैं।
पर्वत पठार रेगिस्थान से पूछते हैं।
कुआं बावड़ी आसमान से पूछते हैं।
हवा पानी अग्नि पंचतत्व से पूछते हैं।
खनिज धातु लवण मृदा से पूछते हैं।
अणु प्रमाणु रसायन धातु से पूछते हैं।
चलो हम एक है कि ईश्वर एक है।
हम सबसे इसका जवाब पूछते हैं।
पूरी कायनात प्रकृति से पूछते हैं।
प्रकृति मुस्कुराकर तब बोलती है।
सब चीजों को अपना प्रेमी मानो।
तब जाकर तुम यह सब जानों।
मुझ में तू है तुझ में मैं हूं मिला वरदान।
प्रेम प्यार से रहने पर होता रहे कल्याण।
बढ़ता रहेगा प्यार चलता रहेगा संसार।
वरना प्रकृति करेगी बड़ा भयंकर प्रहार।
प्रकृति कर देगी नष्ट सब का अहंकार।
हम सब एक है मिलजुल कर रहना है ।
थोड़े छोटे-मोटे कष्ट सबको ही सहना है।
त्याग प्रेम संस्कारों से जीवन जीना है।
सादा जीवन मानवता से हमे रहना है।
प्रकृति की रक्षा परोपकार हमे करना है।
-सत्यवीर वैष्णव 💞✒️💞


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







