ऊंचे महल में रहने वालों
तुम, मुझे कभी नहीं
समझ पाओगे
एक दिन,बस, एक दिन
मेरे साथ,
फावड़ा उठाओ,
रोटी प्याज़ खाओ,
उंगलियों से,
माथे का पसीना हटाओ
तभी, मुझे समझ पाओगे
जन्म दिन में,
लोग,
तुम्हें चेहरा दिखाने आतें हैं
हम,
खुशियां मनाने आते हैं
अगर, दिल रखते हो,
तो, दिल की बात करो
आओ,मेरा हाल पूछो
मुझसे संवाद करो
झरा हुआ है, मेरे माथे से
पसीना,जिस नींव पर
मेरी दुआ है,उस महल में
तुम, जिंदगी भर राज करो
आज भी, तुम्हारी ओर
आशाओं से निहारता हूं
कभी, मुझे काम दो, और
मेरा हिसाब करो
मैं मेहनतकश, और
मेहनत ही,
मेरा नसीब।।
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







