(बाल कविता)
गई लोमड़ी हार
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एक लोमड़ी चढ़ी पेड़ पर
तोड़ रही थी आम ।
आम तोड़ते धीरे धीरे
हो गई उसको शाम ।।
उतर पेड़ से नीचे आई
बिखरे थे सब आम ।
आम उठा, बोरे में भरकर
बोली सीता राम ।
सारे आम भरे गाड़ी में
पहुँच गई बाजार ।
आम बेच कर पैसे पाई
ले ली मोटर कार।।
मोटर गाड़ी पर बैठी वह
गई शेर के पास ।
खेल रहे थे खेल वहाँ सब
लिए हाथ में तास।।
बोली मुझे खिलाओ भैया
बदलूँ मैं तस्वीर।
खेल-खेल में खुल सकती है
मेरी भी तकदीर।।
बोला शेर बहन आ जाओ
रखो यहाँ पर पाँव ।
पक्का खुल जाएगी किस्मत
अभी लगाओ दाँव ।।
लगे दाँव पर गहने पैसे
लगी दाँव पर कार ।
पल में बदली किस्मत ऐसी
गई लोमड़ी हार ।।
निर्धन होकर धनी लोमड़ी
करने लगी विलाप ।
कहा कुल्हाड़ी लालच की खुद
मारा अपने आप ।।
नहीं कहीं की रही आज मैं
हूँ बेबस मजबूर।
बुरी बला लालच है भैया
रहना इससे दूर।
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~राम नरेश 'उज्ज्वल'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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