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कविता की खुँटी

                    

दहेज प्रथा पर बने कानून का सदुपयोग एवं दुरुपयोग

शीर्षक - दहेज प्रथा पर बने कानून का सदुपयोग एवं दुरुपयोग

लेखिका - रीना कुमारी प्रजापत

इस लेख के माध्यम से मैं आज आपको दहेज प्रथा क्या है ? किस तरह एक प्रथा कुप्रथा बन गई ? इस प्रथा से महिलाओं और उनके माता - पिता को छुटकारा दिलाने के लिए कौनसा कानून बनाया गया ? और इस कानून के सदुपयोग और दुरुपयोग के बारे में बताऊंगी।

बहुत समय पहले लड़की का विवाह होने पर लड़की की आवश्यकता की कुछ वस्तुएं और धन लड़की के माता - पिता द्वारा उनकी मर्ज़ी से लड़की का हक मान कर दिया जाता था जिसे स्त्री धन कहा जाता था। जो कि उनकी बेटी का होता था और ससुराल में उसकी जरूरतों को कुछ हद तक पूरा करता था। लेकिन जैसे - जैसे वक्त गुजरता गया इस स्त्री धन पर उसके ससुराल वाले हक जताने लगे और जो धन पहले माता - पिता द्वारा स्वेच्छा से दिया जाता था अब उसकी मांग की जाने लगी।
माता - पिता, कहीं उनकी बेटी अविवाहित ना रह जाए या विवाह के बाद उसे कोई कष्ट ना हो इसलिए अपनी जो भी संपत्ति होती हैं उसे गिरवी रख या कर्जा लेकर बेटी को दहेज देने लगे अब दहेज जो स्वेच्छा से दिए जाने वाले धन की एक प्रथा थी अब वो एक कुप्रथा बन गई थी जो ना चाहते हुए भी लड़की के माता पिता को माननी होती थी। मुंह मांगा दहेज ना मिल पाने पर औरतों पर तरह - तरह के अत्याचार किए जाने लगे, उन्हें मानसिक और शारीरिक प्रताड़नाएं दी जाने लगी ,उनकी हत्याएं की जाने लगी।

स्त्री के साथ किए गए इन दुर्व्यवहारों और हत्याओं से निजात पाने और समाज को इस दहेज की कुप्रथा से छुटकारा दिलाने के लिए कुछ कानून बनाए गए जिनमें से एक है-
"दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961" इसे 1 जुलाई 1961 को लागू किया गया। इस अधिनियम में दहेज लेने वाले और देने वाले दोनो के लिए सजा का प्रावधान रखा गया। धारा 3 में दहेज लेने व दहेज देने वाले के लिए 5 वर्ष का कारावास और 15000 रुपए के जुर्माने का प्रावधान है और अगर कोई दहेज की मांग कर रहा है तो उसके लिए 6 माह से 2 वर्ष का कारावास और 10000 के जुर्माने का प्रावधान है। इस अधिनियम की धारा 8 के तहत आरोपी को अदालत के अलावा जमानत पर रिहा नहीं किया जाता और एक बार शिकायत दर्ज होने के बाद शिकायत को भी वापस नहीं लिया जा सकता है।

इसके अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 498 A के तहत जो कि स्त्री के प्रति हर तरह के बुरे बर्ताव के लिए लागू है द्वारा भी दहेज का मामला निपटाया जा सकता है इसके तहत रिपोर्ट में जिस - जिस का भी नाम लिखाया जाता हैं चाहे वो पति के साथ पूरा परिवार हो या कोई रिश्तेदार हो सभी को रिपोर्ट दर्ज करवाते ही डायरेक्ट गिरफ्तार कर लिया जाता है। IPC की धारा 498 A के तहत यदि स्त्री को दहेज के लिए शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना दी जाती है तो 3 साल की सजा का प्रावधान है और यदि इन प्रताड़नाओं के चलते उस स्त्री की मृत्यु हो जाती है तो IPC की धारा 304B के तहत उस हत्या में जो भी शामिल होता है उसे 7 साल से लेकर आजीवन कारावास हो सकने का प्रावधान है।

दहेज प्रथा पर बने इन कानूनों का सदुपयोग भी हुआ और दुरुपयोग भी हुआ शुरुआत में इसका सदुपयोग हुआ जिससे बहुत हद तक दहेज प्रथा खत्म हो गई और स्त्रीयों को दहेज के लिए ससुराल पक्ष द्वारा जो शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था वो काफी हद तक खत्म हो गया, दहेज को लेकर हत्याएं होनी बहुत कम हो गई। हालांकि ये प्रथा पूरी तरह से खत्म नहीं हुई कहीं - कहीं आज भी ये प्रथा विद्यमान हैं पर उतनी नहीं जितनी की इस कानून को बनने से पहले थी।
दहेज प्रथा पर जो कानून बना उसका सदुपयोग तो हुआ पर सदुपयोग से ज्यादा उसका दुरुपयोग हुआ है और अभी के समय में तो बस इसका दुरुपयोग ही हो रहा है।

आजकल बहुत सी लड़कियां, सभी की नहीं कहूंगी क्योंकि सभी ऐसा नहीं कर रही है पर बहुत सी लड़कियां सिर्फ अपने पति के साथ ही रहना चाहती हैं अपने पति के परिवार के सदस्यों को साथ नहीं रखना चाहती हैं तो वो इन कानूनों का गलत फायदा उठाती है और ससुराल वालों और पति पर दबाव डालती है या अपने पति और सास ससुर से कुछ छोटी - छोटी बातों पर भी मन मुटाव हो जाता है तो वो सीधा दहेज की मांग का आरोप लगा थाने में जा रिपोर्ट लिखवा देती है। महिलाएं अपनी ही मनमानी करना चाहती हैं और जब पति या उसके परिवार के सदस्य उसे रोकना चाहते हैं तो तलाक की मांग करती हैं और तलाक नहीं दिया जाता है तो दहेज मांगने का आरोप लगा पति और उसके पूरे परिवार को गिरफ्तार करवा देती है। इस कानून का आजकल हर तरफ दुरुपयोग ही हो रहा है औरतें अक्सर अपनी बातें मनवाने के लिए ऐसा कर रही हैं जिससे बेगुनाह और इज्जतरदार लोगों को भी जेल जाना पड़ रहा है और ऐसी बेइज्जती झेलनी पड़ रही हैं जिसकी वजह से कितने ही लोग शादियों से दूर भागने लगे हैं।

हालांकि अब इस कानून में कुछ राहत दी गई है दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय लिया कि यदि महिला इस तरह की रिपोर्ट दर्ज करवाती हैं तो जिसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई जाए उन्हें सीधा गिरफ्तार ना किया जाए बल्कि उसकी पूरी जांच पड़ताल की जाए और पत्नी 498 A का केस करती है तो पति कोर्ट में तलाक के लिए केस फाइल कर सकता है।
1 जुलाई 2024 में नया कानून आने वाला है जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया या निवेदन किया है कि इस कानून में कुछ ऐसे बदलाव किए जाए जिससे की इसका दुरुपयोग समाप्त हो सके।


यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है


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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (2)

+

Bhushan Saahu said

Ek bahut hi ghmbhir vishay pr likha h aapne. M aapke vicharo ka aadar krta hu. Ase hi likhti rhiye.

वेदव्यास मिश्र said

इस सम्बन्ध में सुप्रीम कोर्ट का एक नया फैसला आया है जो काबिलेतारीफ है कि अगर जाँच में महिला द्वारा की गई शिकायत गलत पाई गई तो पति के द्वारा काटे गई सजा की अवधि पत्नी को भी काटनी होगी !! इससे निश्चित ही फर्जी केस में कमी आयेगी जिस फर्जी केस का प्रतिशत सचमुच काफी निंदनीय है !! काबिलेतारीफ आलेख सटीक जानकारियों के साथ रीना जी 👌💖💖👌

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