।।गैस के अभाव पर ईंधन की समस्या पर विचार।।
मची फजीहत घर घर में अब गैस कहाँ मिल पाई।
आटा चावल दाल के रहते रोटी कहाँ पकाई।।1।।
वही पुराना समय लौटता आओ फिर से आग जलाएँ।
छोड़ो मन से गैस की आशा उपली कंडा पुनः बनाएँ।।2।।
जतवा चकरी चकरा कांड़ी मूसल अब फरियाद करें।
करो समर्पण प्रकृति सामने भूली संस्कृति याद करें।।3।।
रहे सदा स्वाधीन नीति तो योगा करना होगा।
आल्हा ऊदल हम वंशज हैं बात ध्यान रखना होगा।।4।।
गाय भैंस भैंसा के सँग सँग बैलों को भी पालें।
हल जुंआ बैल अब नाँध खेत में अपना खून उबालें।।5।।
बढ़ रहा पेट में गैस समय है भीषण रोग भगाएँ।
देशी चूल्हे उपली से ही रोटी स्वयं पकाएँ।।6।।
चलने दो यह जंग विश्व की बनो तमासेगीर।
स्वसंसाधन शेष रही तो चमकेगी तकदीर।।7।।
काम और व्यायाम साथ जब दोनों सँग चलेंगे।
बी पी सुगर संयमित होकर तन मन स्वस्थ रहेंगे।।8।।
ब्रह्ममुहूर्त की चहल पहल फिर बीती रीति शुरू होगी।
नख से शिख तक बाह्य अंतरा परिमार्जन तन की होगी।।9।।
जैविक खाद पात गोबर कम्पोस्ट खाद तैयार करें।
स्वस्थ धरा में स्वस्थ बीज बो स्वस्थ अन्न उपराज करें।।10।।
करो बहिष्कृत वस्तु विदेशी राष्ट्रप्रेम संचार करें।
स्वस्थ अन्न जल वायु स्वस्थ से भारत का उपचार करें।।11।।
शुद्धिकरण नीति से भारत में फिर यौवन आयेगा।
राणा शिवा छत्र सांभा जी पुनः पदार्पण लायेगा।।12।।
तुलसी बोल अमोल अधीन पर सुख का सृजन न सपनें।
स्वयं मरे बिन स्वर्ग कदापि न दर्शन होत न अपने।।13।।
गैवीनाथ मिश्र शाहपुर रीवा
9200981625


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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