विद्रोह की चिंगारी
डॉ.एच सी विपिन कुमार जैन "विख्यात"
कठपुतली, कब तक नाचेगी इन धागों के इशारे पर?
कब तक रहेगी बेबस इस बंधन के मारे पर?
शायद भीतर कहीं एक चिंगारी सुलग रही है,
अपनी आज़ादी की एक प्यास सी जग रही है।
कभी अचानक कोई झटका, कोई अनियंत्रित चाल,
दिखाता है भीतर के विद्रोह का हल्का सा हाल।
शायद एक दिन ये धागे टूट ही जाएँगे सारे,
और कठपुतली नाचेगी अपनी मर्ज़ी के सहारे।
यह विद्रोह की उम्मीद ही तो जीवन है इसका,
बेबसी में भी आज़ादी का सपना है पलका।
कठपुतली का यह संघर्ष सिखाता है हमें भी,
अपने बंधनों को तोड़कर जीना है कभी न कभी।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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