खामोशी समझने लगे चाहतें आहत नही।
अब बयाँ करने की 'उपदेश' जरूरत नही।।
ऑनलाइन देखकर इस कदर भागते क्यों।
मोहब्बत में ताक-झाक की इजाज़त नही।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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खामोशी समझने लगे चाहतें आहत नही।
अब बयाँ करने की 'उपदेश' जरूरत नही।।
ऑनलाइन देखकर इस कदर भागते क्यों।
मोहब्बत में ताक-झाक की इजाज़त नही।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
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