सबकी चाहते पूरी करते-करते,
सबको समय देते-देते,
सबकी भावनाओं को समेटते-समेटते,
खुद से ही बातें करते-करते,
थक जाती हूँ मैं कभी-कभी।
मुझे भी कोई ध्यान से सुने,
मेरे समय को अपना समय दे,
मेरे शब्दों में छुपी हुई
खामोश गहराई को समझे
दिल चाहता है ये कभी-कभी।
हर रिश्ते को निभाते-निभाते
अक्सर भूल जाती हूँ
“मैं”कौन हूँ
कोई मुझे भी मुझसे मिलाए
ये ख्वाहिश जागती है कभी-कभी।
वन्दना सूद
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







