हर परिवार में
एक व्यक्ति ऐसा जन्म लेता है,
जो सबसे आज्ञाकारी नहीं होता,
सबसे जागा हुआ होता है।
वह पुरखों की तस्वीरों से प्रेम करता है,
पर उनकी हर आदत से सहमत नहीं होता।
वह सम्मान करता है,
पर अंधानुकरण नहीं।
वह प्रश्न पूछता है
जहाँ सदियों से
सिर्फ़ सिर झुकाए जाते रहे हों।
उसे अक्सर
ज़िद्दी कहा जाता है,
बाग़ी कहा जाता है,
संस्कारहीन भी।
क्योंकि हर घर,सच से पहले
सुविधा का पक्ष लेता है।
वह देख लेता है
कि दादी की चुप्पी त्याग नहीं थी,
मजबूरी थी।
कि पिता का कठोर होना
स्वभाव नहीं था,
अनकहे दर्द का कवच था।
कि माँ का हर बार झुक जाना
गुण नहीं था,
अस्वीकृति का डर था।
वह पहली बार
घावों को परंपरा से अलग करता है।
और यहीं से
परिवार का इतिहास बदलना शुरू होता है।
क्योंकि
हर वंश में लोग पैदा होते हैं
जो नाम आगे बढ़ाते हैं,
पर बहुत कम लोग जन्म लेते हैं
जो चेतना आगे बढ़ाते हैं।
वह कहता है—
जो प्रेम है, वह रहेगा।
जो सम्मान है, वह रहेगा।
जो करुणा है, वह रहेगी।
लेकिन—
जो भय है, वह नहीं रहेगा।
जो अपमान है, वह नहीं रहेगा।
जो चुप्पी है, वह नहीं रहेगी।
जो अन्याय है, वह नहीं रहेगा।
और उसी क्षण
सदियों पुराना अंधेरा
थोड़ा-सा कम हो जाता है।
क्योंकि
परिवार की पहली जागी हुई आत्मा
घर नहीं छोड़ती,
वह घर के भीतर
सोई हुई रोशनी जगा देती है।
सबसे कठिन काम
वंश को आगे बढ़ाना नहीं,
वंश के दुःख को
अपने ऊपर समाप्त कर देना है।
हर परिवार में एक व्यक्ति ऐसा जन्म लेता है,
जो विरासत का वारिस नहीं बनता—
वह विरासत का संपादक बनता है।
वह रक्त नहीं बदलता,
वह रक्त में बहती हुई कहानी बदल देता है।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







