रूह मेरी मुझसे ही जब कुछ तीखे सवाल करती है
नजरें चुराकर उससे बहुत दूर निकल जाता हूँ मैं
थककर जब वह सो जाती हैखूब गहरी नींद में तो
चुपचाप दबे पाँव फिर जिस्म में लौट आता हूँ मैं. .

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
रूह मेरी मुझसे ही जब कुछ तीखे सवाल करती है
नजरें चुराकर उससे बहुत दूर निकल जाता हूँ मैं
थककर जब वह सो जाती हैखूब गहरी नींद में तो
चुपचाप दबे पाँव फिर जिस्म में लौट आता हूँ मैं. .
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